बहू को अपनी बेटी का दर्जा दें। उसकी नादानियों को नजरअंदाज कर दिया करें..इक़बाल उस्मानी – किस्मत न्यूज

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बहू को अपनी बेटी का दर्जा दें। उसकी नादानियों को नजरअंदाज कर दिया करें..इक़बाल उस्मानी

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*शादियों का सीजन* है कई घरों में नई बहुएं आई हैं। जब बहू को घर ले कर आएं, तो खुदारा उसे एडजस्ट होने का वक्त दें। बीस से बाईस साल की लड़की से आप पचास साल की औरत की समझदारी की उम्मीद मत करें। बहू को अपनी बेटी का दर्जा दें। उसकी नादानियों को नजरअंदाज कर दिया करें—

 

 वह भी अपने वाल्दैन के लिए बच्ची ही थी— अगर सास मां नहीं बन सकती तो क्या हुआ। अपनी बहू की दोस्त बन कर उस पर मोहब्बत शफक्कत न्योछावर कर सकती है–वह काम से फारिग हो तो उसका माथा प्यार से चूम के इतना कह दें, मेरी बेटी बहुत थक गई होगी। खाना खाने लगे तो बहू को आवाज दे कर अपने पास बिठाएं, बेटे के सामने बहू की तारीफ कर दें।

 

मैं यकीन से कहता हूं इन छोटी-छोटी बातों से खुश हो कर वह दिलो-जान से आपकी सेवा करेगी। उसकी हिम्मत अफजाई करें, घर के मामलों में उससे मशवरा करें, महसूस कराएं कि उसके बिना आपका घर अधूरा है। आप अपनी बहन-बेटियों के लिए दुनिया का हर सुख चाहते हैं। तो दूसरों की बहन-बेटियों को लाकर उन्हें भी दुनिया का हर सुख देंगे, तो वह अपने मायके को भूलने लगेगी।

 

ए अल्लाह, हमारे समाज में होने वाली शादियों को बा मुबारक और बा मकसद बना दे— दो परिवारों के इस मिलन में प्यार, खुलूस, ईसार, और आजीजी पैदा फरमा — बहू के लिए सास मां बने और सास के लिए बहू, बेटी बन जाए। ऐसा खुशगवर माहौल सभी घरों में पैदा फरमा ए अल्लाह, हमारा समाज, हमारे परिवारों को इस्लाम के अलम बरदार बन जाएं। ऐसी सिफत पैदा फरमा—ए अल्लाह, सभी बेटियों के नसीब अच्छे और बुलंद कर। ए अल्लाह, आप ﷺ ने खैर की जितनी भी दुआएं मांगी हैं, उनमें हमारा और पूरी उम्मत का हिस्सा नसीब फरमा,

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