“बड़े तुर्रम खां बनते हो”आइए आज उस “तुर्रम खां” के बारे में जानते हैं, जिन्होंने 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ़ हुर्रियत पसंदों के कई दिलेराना और कामयाब हमलों की क़यादत की।सूत्र
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एसी कहावत आपने अक्सर सुनी होगी।.इस जुर्म में उन्हें लैम्प पोस्ट से लटका कर सर-ए-आम फ़ाँसी दी गई, इस तरह वो अंग्रेजों द्वारा खुले आम फ़ाँसी पर लटकाए जाने वाले पहले स्वतंत्रता सेनानी थे, लेकिन आज उनका नाम और बहादुरी के कारनामे साज़िश के तहत ग़ायब कर दिए गए हैं, ताकि हमारे अंदर हीन भावना पैदा की जा सके। आज भी हैदराबाद डक्कन में उनके नाम से एक चौराहा मंसूब है।
Post courtesy = hassan sahab,
Refrence:- Book on Turrebaz Khan released” The Hindu 18 July 2012
ISSN 0971-751X Retrieved 28 August 2016
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