सामाजिक सौहार्द की अनिवार्यता
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” सकारात्मक चिंतन “
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आत्म अवलोकनार्थ।
सम्मानीय आत्मजन,
शुभ दिवस।
” सामाजिक सौहार्द की अनिवार्यता “
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मनुष्य,परिवार व समाज परस्पर संघटक होकर परस्पर सौहार्द व सदभाव के अभाव में इनमें सुख,समृद्धि,
खुशहाली व उन्नयन की परिस्थितियां उत्पन्न व विकसित नहीं हो सकतीं है।
व्यक्तिगत व पारिवारिक सौहार्द ,सदभावना व सहयोग की भांति ही सामाजिक सौहार्द,सदभावना
व सहयोग भी अतिशय महत्वपूर्ण व अनिवार्य है,क्योंकि इसके अभाव में व्यक्तिगत व पारिवारिक स्तर पर भी सुख,समृद्धि,
खुशहाली,उन्नयन व विकास का वातावरण व्यापक स्तर पर प्रतिकूलतः प्रभावित होता है।इसके लिए सामाजिक मुखिया को परिवार के मुखिया के समान ईश्वरीय भाव से नेतृत्व करना आवश्यक है।
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Regards:Iqbal Khan Gauri,Retired District Judge,M.P.
Now:Law adviser and Human duties Activist,Ujjain.
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