अध्यान” या असावधानी या असतर्कता की अवस्था है,जिसका परिणाम सदैव दुःखद, शर्मनाक,दुर्भाग्यपूर्ण, क्षतिकारक,विनाशक व नकारात्मक होता है
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” सकारात्मक चिंतन “
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आत्म अवलोकनार्थ।
सम्मानीय आत्मजन,
शुभ दिवस।
” प्रज्ञा- अभिव्यक्तियाॅ “
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(01)अच्छा स्वास्थ्य,
अच्छी शिक्षा,अच्छी सोच व अच्छी आजीविका से वंचित व्यक्ति को दुर्भाग्यग्रस्त समझना चाहिए।इसलिए मनुष्य को सार्थक लौकिक व पारलौकिक सार्थक सफलता के लिए इन दुर्भाग्यों से मुक्ति के लिए सतत निष्ठापूर्वक प्रयास करना आवश्यक है।
(02)आत्म चेतना के विकास के बिना रचनात्मक सृजन की परिस्थितियाॅ उत्पन्न नहीं होती हैं; और आत्म चेतना का विकास उस अमृत पुत्र के ह्रदय में होता है,जो अध्यात्म,
सकारात्मकता व मानवतावाद का समर्थक,सहयोगी व सारथी होता है।
(03)इस धरती पर प्रचलित समस्त पंथगत धर्मों की समवेत स्वर मे शिक्षा व संदेश है कि लौकिक व पारलौकिक सार्थक सफलता के लिए “ध्यान ” का मंत्र व मार्ग अंगीकार करे।
(04) अंधानुकरण एक प्रकार की भेड़चाल/मूर्खता/मदहोश होकर
“अध्यान” या असावधानी या असतर्कता की अवस्था है,जिसका परिणाम सदैव दुःखद,
शर्मनाक,दुर्भाग्यपूर्ण,
क्षतिकारक,विनाशक व नकारात्मक होता है।
(05)यह संसार द्विन्दात्मक(dualistic)होने के कारण ईश्वरिय योजनानुसार द्वन्दात्मक (struggling) है।मनुष्य जीवन की द्वन्दात्मक परिस्थितियों को नियंत्रित,
संयमित,मर्यादित व
अनुशासित करने के लिए संतुलन,सामंजस्य,
समन्वय,सदभावना,
सहयोग व सहकारिता की भावनाओं व मूल्यों के तर्पण व अर्पण की आवश्यकता होती हैं।
अज्ञात “भारती”
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Regards:Iqbal Khan Gauri,Retired District Judge,M.P.
Now:Law adviser and Human duties Activist,Ujjain.
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