मनुष्य,आदर्श परिवार व आदर्श समाज का निर्माण कर एकात्म मानवता वाद व वसुधैव कुटुंबकम् के दर्शन को मूर्त रूप प्रदान कर इस धरती को स्वर्ग बनाने में सहयोगी बने। – किस्मत न्यूज

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मनुष्य,आदर्श परिवार व आदर्श समाज का निर्माण कर एकात्म मानवता वाद व वसुधैव कुटुंबकम् के दर्शन को मूर्त रूप प्रदान कर इस धरती को स्वर्ग बनाने में सहयोगी बने।

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“सकारात्मक चिंतन “

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 आत्म अवलोकनार्थ।

  सम्मानीय आत्मजन,

    शुभ दिवस ।

   “प्रभु प्रेमी होने का प्रभाव”

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   प्रत्येक मनुष्य में ईश्वरिय सत्ता में आस्था होने का प्राकृतिक बोध व भावना होती है। ईश्वरिय सत्ता में विश्वास होकर आस्तिक होना और अपनी जाति,धर्म व सम्प्रदाय की ईश्वरिय आस्थागत मान्यताओं और विश्वासों के अनुसार ईश्वर की आराधना दोनों पृथक विषय हैं ।

  मनुष्य व अनंत सृष्टि का वैज्ञानिक व व्यवस्थित निर्माण व संचालन ईश्वरिय सत्ता के अस्तित्वगत होने के पर्याप्त प्रमाण हैं। कोई भी प्रज्ञावान व्यक्ति ईश्वरिय सत्ता के अस्तित्व को अस्वीकार नहीं करता है। कुछेक लोग भौतिक व अवांछित वैज्ञानिक दृष्टिकोण व कुछेक लोग सामाजिक भेदभाव व प्रताड़ना से उत्पन्न आक्रोश के कारण ईश्वरिय अस्तित्व व आस्था को अस्वीकार कर स्वयं को नास्तिक संज्ञापित करते हैं।

 मानवतावाद का अनुयायी कभी भी नास्तिक नहीं होता है।मानवतादी एकात्म मानवता वाद व वसुधैव कुटुंबकम् के दर्शन में विश्वास करने पर ही सकारात्मक मानवीय मूल्यों से संस्कारित व संचालित होकर प्रभु प्रेमी होने का पद प्राप्त कर अपने जीवन को लौकिक व पारलौकिक स्तर पर सार्थक व सफल बनाकर इस धरती को स्वर्ग बनाने में सहयोगी होता है।

 प्रभु प्रेमी के हृदय व मस्तिष्क में नकारात्मक विचारों व भावनाओं को कोई स्थान न होकर उसका हृदय व मस्तिष्क सकारात्मक मानवीय मूल्यों से सुसज्जित होकर वह मानवता वाद के मार्ग पर आरूढ़ होता है ।मानवतावादी ही सच्चा प्रभु प्रेमी होकर प्रभु प्रेमी के हृदय व मस्तिष्क में अपने आत्मजन के प्रति घृणा व द्वैष का कोई भाव नहीं होता है।

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संकल्पित मानवीय उदघोष: “राजधर्म का पालन राष्ट्र की खुशहाली का है ज्ञापन”। यह ध्येय घोष राजयोग पदाधिकारियों के लिए राजकीय कर्त्तव्य निर्वहन में सारथी होना चाहिए।

“राजधर्म “का पालन ही “धर्मराज “की स्थापना का आधार है ।”राजधर्म” का ईश्वरिय निष्ठा से पालन कर आदर्श मनुष्य,आदर्श परिवार व आदर्श समाज का निर्माण कर एकात्म मानवता वाद व वसुधैव कुटुंबकम् के दर्शन को मूर्त रूप प्रदान कर इस धरती को स्वर्ग बनाने में सहयोगी बने।

आपका आत्म-बंधु:

 इक़बाल ख़ान ग़ौरी,

  सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश म.प्र.।

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