*शास. महाविद्यालयों के अतिथि सहायक प्रोफेसर के नियमितीकरण पर सुनवाई हेतु हाईकोर्ट की मंजूरी*
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*मामले की सुनवाई 20 फर. को*
*तालिब हुसैन*
जबलपुर. शासकीय महाविधालयों के अथिथि सहायक प्राध्यापकों को नियमित करने की उम्मीद जगी है. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत की डबल बैंच ने इस मामले की सुनवाई के लिए सहमति देते हुए 20 फरवरी की तारीख निर्धारित की है. याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि याचिका कर्ताओं के पास सभी आवश्यक योग्यताएं, व्यापक अनुभव और शिक्षण कौशल है, एवं पीएचडी
की उपाधि है और लगभग 29 वर्षों से अधिक समय से अतिथि प्राध्यापक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं लिहाजा वस नियमतिकरण के योग्य हैं. अधिवक्ता गुप्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि 1992 से 2017 तक एमपी पीएससी द्वारा सहायक प्रोफेसर सामान्य वर्ग के लिए कोई पद घोषित नहीं किए गए हैं, 2017 में आयोजित पीएससी परीक्षा में बैठने की अनुमति उन्हें उच्च न्यायालय से मिली थी.हालांकि उन्होंने पीएससी द्वारा निर्धारित आयु सीमा पार कर ली थी और परीक्षा भी उत्तीर्ण की थी. 2017 के बाद एमपीपीएससी द्वारा 2023 तक कोई रिक्ति घोषित नहीं की गई थी. हालांकि पीएससी के माध्यम से रोजगार के दिशानिर्देश और मानदंडों के अनुसार उनको पीएससी परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक होता है और उन जैसे उम्मीदवारों के लिए कोई छूट प्रदान नहीं करता है जो गलत प्रावधान है.जिन्होंने पहले ही परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है और शिक्षण में इतना कौशल और अनुभव प्राप्त कर लिया है और पीएससी अभी भी उम्मीद करता है कि वह इतनी अधिक उम्र में फिर से चयन के लिए पुनः नए नियमों के अंतर्गत परीक्षा दें. आवेदक गण पीएससी की शर्तों और मानदंडों में छूट देने के मामले को इस माननीय न्यायालय के समक्ष रखना चाहते है ताकि उन्हें अपने चयन के लिए उसी प्रक्रिया से ना गुजरना पड़े
और पीएससी अभी भी उससे इतनी अधिक उम्र में फिर से चयन के लिए योग्य होने की अपेक्षा करता है.आवेदकों को हर वर्ष अतिथि सहायक प्रोफेसर हेतु आवेदन ना करना पड़े ताकि वे अपनी वर्तमान नौकरी के स्थान पर 65 वर्ष की आयु तक काम करना जारी रख सकें. इसलिए यह याचिका प्रस्तुत की है۔ दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट याचिका पर 20 फरवरी को सुनवाई करेगा.
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