रूह अफ़्ज़ा सिर्फ एक शरबत नहीं, एक सोच है — और उस सोच का नाम है Hamdard
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क्या आप जानते हैं—जिस ब्रांड से आपकी गर्मियों की यादें जुड़ी हैं — रूह अफ़्ज़ा, वो किसी बड़े कॉरपोरेट बिज़नेस का हिस्सा नहीं, बल्कि एक “वक़्फ़” है।
Hamdard को 1948 में हकीम अबुल मजीद साहब के बड़े बेटे हकीम अब्दुल हमीद साहब ने “वक़्फ़-ए-आम” (public charitable waqf) घोषित किया था — यानी ऐसा ट्रस्ट जो समाज की सेवा के लिए समर्पित हो।
Hamdard एक वक़्फ़ (Waqf) संस्था है, लेकिन यह एक आम वक्फ़ की तरह नहीं बल्कि एक “Non-profit Charitable Trust” के रूप में कार्य करती है, इसका कार्यक्षेत्र हैं –
मेडिकल रिसर्च
यूनानी चिकित्सा का विकास
शिक्षा (जैसे Jamia Hamdard यूनिवर्सिटी)
गरीबों की सहायता
हेल्थकेयर संस्थानों का संचालन
रूह अफ़्ज़ा या Hamdard के किसी भी प्रोडक्ट से जो भी प्रॉफिट होता है, वो कंपनी के मालिकों की जेब में नहीं जाता—बल्कि सीधे Hamdard National Foundation को जाता है, जो कि वक़्फ़ के तौर पर समाजसेवा में लगा रहता है।
“Hamdard” का मतलब ही होता है — ‘दुख में भागीदार’।
और ये नाम सिर्फ नाम नहीं, इसका हर काम इसी मकसद को निभाता है।
तो अगली बार जब आप रूह अफ़्ज़ा का घूंट लें, याद रखिए — ये स्वाद सिर्फ ठंडक नहीं, बल्कि किसी ज़रूरतमंद की मदद भी है।
– Md Iqbal
#itzazizreaction
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