चार दिन गायब होकर देख लीजिए, लोग आपका नाम भूल जाएंगे… इंसान सारी ज़िंदगी इस धोखे में रहता है कि, वह लोगों के लिए अहम है….
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लेकिन हक़ीक़त यह होती है कि,
आपके होने ना होने से किसी को कोई फ़र्क नही पड़ता है….
जिसकी जितनी ज़रूरत होती है,
उसकी उतनी ही अहमियत होती है……
न रुकी वक़्त की गर्दिश, न ज़माना बदला,
पेड़ सूखा तो परिंदो ने ठिकाना बदला….
खलीफा अब्दुल वाहिद मंसूरी की विशेष ख़बर
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