नई दिल्ली: यूनीक आइडेंटिफिकेशन ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने स्कूलों से अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (MBU) की व्यवस्था तेज करने का अनुरोध किया है, ताकि 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के अधिक सटीक आधार रिकॉर्ड प्रक्रियाओं के दौरान छात्रों और उनके परिवारों को होने वाली असुविधाओं से बचा जा सके.
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*_17 करोड़ बच्चों का आधार अपडेट किया जाएगा, UIDAI और शिक्षा मंत्रालय ने मिलाया हाथ_*ओम प्रकाश मालवीय
ये प्रयास डिपार्टमेंट ऑफ स्कूल ऐजुकेशन एंड लिटरेसी (DoSEL) के सहयोग से किए जाएंगे ताकि छात्रों के आधार की एमबीयू स्थिति को यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) प्लेटफॉर्म के साथ इंटिग्रेट किया जा सके.अधिकारियों ने कहा, “यह कदम स्कूलों को केवल यूडीआईएसई+ ऑनलाइन टूल में अपने छात्रों का डेटा देखने और छात्रों के लिए बायोमेट्रिक अपडेट कैंप आयोजित करने में सक्षम बनाने की एक पहल का हिस्सा है .”
UIDAI नंबरों के आधार पर लगभग 17 करोड़ आधार नंबर ऐसे बच्चों के हैं जिन्हें 5 वर्ष या 15 वर्ष की आयु में अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट की आवश्यकता होती है. ये दोनों अपडेट महत्वपूर्ण हैं क्योंकि बच्चे के बायोमेट्रिक्स (उंगलियों के निशान, आंख की पुतली और तस्वीर) में उनके विकास के दौरान कई बदलाव होते हैं. अगर ये दोनों अपडेट पूरे नहीं किए गए, तो बच्चों को लाभकारी सहायक सेवाओं, परीक्षा पंजीकरण और डिजिटल सेवा प्रक्रियाओं तक पहुंचने के लिए आवश्यक प्रमाणीकरण प्रक्रिया को पूरा करने में कठिनाई होगी.
आखिरी पल की परेशानियों से बचाव
UIDAI के अधिकारियों ने बताया कि समय पर बायोमेट्रिक्स अपडेट न करने से अक्सर आखिरी पलों में दिक्कत होती है. छात्र और अभिभावक अक्सर नीट, जेईई या सीयूईटी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की समय सीमा से ठीक पहले या सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार नामांकन केंद्रों पर पहुंचते हैं. एक अधिकारी ने कहा, “अगर स्कूल और अभिभावक समय पर आधार नामांकन प्रक्रिया पूरी कर लें, तो इससे आसानी से बचा जा सकता है.”
इस चुनौती की गंभीरता को रेखांकित करते हुए UIDAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भुवनेश कुमार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर स्थानीय शिक्षा अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने का अनुरोध किया है, ताकि यह पहल बिना किसी समस्या के चल सके. कुमार ने कहा कि यूडीआईएसई+ डेटा का उपयोग करते हुए स्कूल-आधारित शिविर दृष्टिकोण से शिविर आवंटन और लामबंदी प्रक्रिया में अधिक संख्या में बच्चों तक पहुंच संभव होगी.
कुमार ने अपने पत्र में कहा, “यह सोचा गया था कि स्कूलों के माध्यम से एक शिविर का आयोजन लंबित मैंडेटरी बायोमैट्रिक अपडेट (MBU) को पूरा करने में मददगार हो सकता है, क्योंकि सबसे बड़ी समस्या यह थी कि स्कूलों को कैसे पता चलेगा कि किन छात्रों ने बायोमेट्रिक अपडेट नहीं किए हैं. यूआईडीएआई और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की तकनीकी टीमों का धन्यवाद, जिन्होंने यूडीआईएसई+ एप्लिकेशन का उपयोग करके इस समस्या का सफल समाधान प्रस्तुत किया है. अब सभी स्कूल लंबित एमबीयू देख सकते हैं.”
नया सिस्टम कैसे काम करेगा?
UDISE+ प्लेटफॉर्म, जिसमें भारत में स्कूली शिक्षा के सबसे महत्वपूर्ण डेटासेट शामिल हैं, नामांकित छात्रों की आधार एमबीयू स्थिति का विस्तार करेगा और इससे स्कूलों को रियल टाइम में लंबित बायोमेट्रिक अपडेट वाले छात्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी. अधिकारियों ने कहा कि यह डेटा-संचालित दृष्टिकोण अनुमान लगाने की प्रक्रिया को समाप्त करेगा, लक्षित पहुंच सुनिश्चित करेगा और एमबीयू के लंबित कार्यों को तेजी से पूरा करने में मदद करेगा.
छात्रों और अभिभावकों के लिए लाभ
छात्रों के लिए आधार बायोमेट्रिक्स का समय पर अपडेट कई प्रकार की सेवाओं और अधिकारों तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करेगा, इनमें प्रतियोगी और विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षाओं के लिए पंजीकरण, छात्रवृत्ति, मध्याह्न भोजन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए पात्रता शामिल हैं. इसके अलावा स्कूल से कॉलेज में स्थानांतरण के दौरान आसान प्रमाणीकरण. अभिभावकों के लिए स्कूलों में शिविर लगाने से आधार केंद्रों के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हो जाएगी, जिससे समय और मेहनत की बचत होगी.
राष्ट्रीय प्राथमिकता
लगभग 17 करोड़ लंबित अपडेट के साथ यूआईडीएआई-शिक्षा मंत्रालय की पहल हाल के वर्षों में सबसे बड़े डेटा सुधार और आउटरीच अभियानों में से एक है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह भारत की शिक्षा और कल्याण संरचना से जुड़ी एक आधारभूत पहचान प्रणाली के रूप में आधार की केंद्रीयता को भी रेखांकित करता है.
पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए आधार नामांकन चेहरे की तस्वीरों और जनसांख्यिकीय डेटा के साथ किया जाता है, जबकि पांच साल की उम्र में बायोमेट्रिक विवरण अनिवार्य हो जाते हैं. बच्चे के पंद्रह साल का होने पर इन बायोमेट्रिक्स को एक बार फिर अपडेट किया जाना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि रिकॉर्ड जीवन भर उपयोग के लिए विश्वसनीय रहें.
अधिकारियों ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा जल्द ही स्कूल-स्तरीय एमबीयू शिविर शुरू करने की उम्मीद है, जिसकी शुरुआत उन जिलों से होगी जहां लंबित मामले सबसे अधिक हैं. तकनीक को जमीनी स्तर की कार्रवाई के साथ एकीकृत करके, सरकार इस प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की उम्मीद करती है.
शिक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, “यूआईडीएआई की शिक्षा मंत्रालय के साथ साझेदारी दर्शाती है कि व्यावहारिक चुनौतियों को हल करने के लिए यूडीआईएसई+ जैसे तकनीकी प्लेटफॉर्म का कैसे लाभ उठाया जा सकता है।
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