नई दिल्ली.वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय के साथ विशेष बातचीत: 50 वर्षों की पत्रकारिता और राजनीति के अनुभव.
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रीपोर्ट मनोहर मालवीय
नई दिल्ली: हिंदी पत्रकारिता के दिग्गज और पद्म भूषण से सम्मानित राम बहादुर राय ने हाल ही में पत्रकार राजीव रंजन के साथ एक विशेष पॉडकास्ट में अपने 50 वर्षों के पत्रकारीय और राजनीतिक सफर को साझा किया। ‘माहौल क्या है’ (#maholkyahai) नामक इस पॉडकास्ट में राय साहब ने अपनी बेबाक लेखनी, जेपी आंदोलन, आपातकाल और भारतीय पत्रकारिता की बदलती तस्वीर पर खुलकर बात की।
राम बहादुर राय, जो वर्तमान में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के अध्यक्ष और श्री गुरु गोविंद सिंह त्रिशताब्दी विश्वविद्यालय, गुरुग्राम के कुलाधिपति हैं, ने अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण पड़ावों को उजागर किया। गाजीपुर के सोनाड़ी गांव में जन्मे राय ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की और छात्र राजनीति से अपने करियर की शुरुआत की। 1974 के जेपी आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका और आपातकाल के दौरान 16 महीने की जेल यात्रा ने उनके व्यक्तित्व को निखारा।
पॉडकास्ट में राय साहब ने 1979 में ‘हिंदुस्तान समाचार’ से शुरू हुए अपने पत्रकारीय सफर का जिक्र किया, जिसमें ‘जनसत्ता’ और ‘नवभारत टाइम्स’ जैसे प्रमुख अखबारों में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही। उन्होंने 1991 के हवाला कांड के खुलासे जैसे साहसिक पत्रकारीय कार्यों को भी याद किया, जिसने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी थी। उनकी पुस्तकों जैसे ‘रहबरी के सवाल’, ‘मंजिल से ज्यादा सफर’ और ‘भारतीय संविधान: अनकही कहानी’ ने उनके गहन चिंतन और लेखन कौशल को रेखांकित किया।
राजीव रंजन के साथ इस बातचीत में राय साहब ने पत्रकारिता के वर्तमान परिदृश्य पर भी टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने निष्पक्षता और विश्वसनीयता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “पत्रकारिता का मूल उद्देश्य समाज को सत्य से अवगत कराना है, और यह तब तक संभव है जब तक कलम में साहस और ईमानदारी बरकरार है।”
यह पॉडकास्ट पत्रकारिता और राजनीति के क्षेत्र में रुचि रखने वालों के लिए एक प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक अनुभव है।
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