बैतूल। मनुष्य को शीलवान, समाधिमान, उद्यमशील और प्रज्ञावान होकर जीना चाहिए। वह सत्य को सबसे पहला धर्म कहते हैं और धर्म का आचरण निष्ठा से करने की हिदायत देते हैं। महात्मा बुद्ध के शब्दों में मनुष्य स्वयं अपना स्वामी है। उसे खुद ही अपने आप को प्रेरित करना चाहिए। – किस्मत न्यूज

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बैतूल। मनुष्य को शीलवान, समाधिमान, उद्यमशील और प्रज्ञावान होकर जीना चाहिए। वह सत्य को सबसे पहला धर्म कहते हैं और धर्म का आचरण निष्ठा से करने की हिदायत देते हैं। महात्मा बुद्ध के शब्दों में मनुष्य स्वयं अपना स्वामी है। उसे खुद ही अपने आप को प्रेरित करना चाहिए।

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*रचनात्मकता के साथ अध्यात्म की आवश्यक*

*पांच हजार कागज के टुकड़ों से बच्चों ने बनाई भगवान बुद्ध की पेंटिंग*

अकरम खान पटेल की रिपोर्ट। 

बैतूल। मनुष्य को शीलवान, समाधिमान, उद्यमशील और प्रज्ञावान होकर जीना चाहिए। वह सत्य को सबसे पहला धर्म कहते हैं और धर्म का आचरण निष्ठा से करने की हिदायत देते हैं। महात्मा बुद्ध के शब्दों में मनुष्य स्वयं अपना स्वामी है। उसे खुद ही अपने आप को प्रेरित करना चाहिए। युवा चित्रकार व कला गुरु श्रेणिक जैन के मार्गदर्शन में शिक्षिका उमा सोनी के साथ आरडी पब्लिक स्कूल के नन्हें बच्चों ने मिलकर तीन फीट चौडी व चार फीट ऊंची बुद्ध की कोलार्ज कलाकृति जो आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस पेंटिंग को बनाने में लगभग पांच हजार कागज के टुकड़ों पर रंग लगाकर चिपकाया गया जिसमे एक माह से ज्यादा का समय लगा है। भगवान बुद्ध की हजारों कागज के टुकड़ों से बनी अलौकिक कलाकृति दे रही शांति का संदेश रही हैं। इस मौके पर श्रेणिक जैन ने बताया कि आज बच्चों को रचनात्मकता के साथ अध्यात्म की आवश्यकता है। जिससे वे भविष्य के अच्छे नागरिक बने। बच्चों के इस कलाकृति की सभी ने सराहना की है।

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