भोपाल.मध्यप्रदेश में गोवंश संकट: तस्करी-हत्या पर सरकार चुप,  गो मांस पर 0% जीएसटी – मुख्यमंत्री की गोवर्धन पूजा का पाखंड असहनीय. – डॉ विक्रम चौधरी  – किस्मत न्यूज

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भोपाल.मध्यप्रदेश में गोवंश संकट: तस्करी-हत्या पर सरकार चुप,  गो मांस पर 0% जीएसटी – मुख्यमंत्री की गोवर्धन पूजा का पाखंड असहनीय. – डॉ विक्रम चौधरी 

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भोपाल, 21 अक्टूबर 2025 – मध्यप्रदेश में गोवंश की स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है, जहां तस्करी, हत्या और गौशालाओं की दयनीय हालत ने राज्य सरकार की पोल खोल दी है। कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता डॉ. विक्रम चौधरी ने आज इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा सरकार की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश गोवंश के संकट से जूझ रहा है, तब मुख्यमंत्री गोवर्धन पूजा जैसे कार्यक्रमों में व्यस्त होकर जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। यह राजनीति न केवल असहनीय है, बल्कि गोमाता की रक्षा के नाम पर किए जा रहे दावों को पूरी तरह खोखला साबित करती है। डॉ. चौधरी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार गोवंश संरक्षण के नाम पर केवल चुनावी लाभ उठाती है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।

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मध्यप्रदेश में गोवंश तस्करी का जाल इतना फैल चुका है कि राज्य की सीमाएं अपराधियों के लिए खुली किताब बन गई हैं। अप्रैल 2025 में बांसवाड़ा-रतलाम बॉर्डर पर 70 से अधिक ट्रकों में गोवंश की तस्करी रोकी गई थी, जहां पुलिस एस्कॉर्ट के साथ वाहन गुजर रहे थे। यह घटना स्पष्ट रूप से सरकार की मिलीभगत की ओर इशारा करती है, क्योंकि राजस्थान और मध्यप्रदेश दोनों जगह भाजपा की सरकारें हैं। भारत आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत ने भी आरोप लगाया था कि तस्करी में सरकारी संरक्षण है। इसी तरह, डूंगरपुर में गौ रक्षकों और पुलिस के बीच हाथापाई हुई, जब पुलिस ने दावा किया कि गोवंश को किसी मेले के लिए ले जाया जा रहा है, लेकिन गौ रक्षकों ने इसे तस्करी का बहाना बताया। छतरपुर के बक्सवाहा क्षेत्र में बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने शिकायत की कि रोजाना कई ट्रकों में गोवंश की तस्करी हो रही है और स्थानीय पुलिस इसमें सहयोग कर रही है। महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश बॉर्डर पर सेंधवा तहसील से भी बड़े पैमाने पर तस्करी की रिपोर्ट्स सामने आई हैं, जहां गोवंश को कत्लखानों में भेजा जा रहा है। डॉ. चौधरी ने कहा कि सरकार के नए कानून, जैसे गोवंश संवर्धन एवं संरक्षण अधिनियम 2024, जो तस्करों को 7 वर्ष की सजा का प्रावधान करता है, मात्र कागजी हैं। इनकी वजह से कोई प्रभावी रोक नहीं लगी, जो भाजपा सरकार की नीयत पर सवाल उठाता है। 

गोवंश हत्या के मामले तो और भी क्रूर हैं, जो राज्य में कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। जून 2024 में सिवनी जिले में 54 गोवंशों के शव मिले थे, जिनमें से कई के गले रेतकर हत्या की गई थी। उज्जैन के घट्टिया में मार्च 2025 में गोहत्या के आरोपियों को पुलिस ने जुलूस निकालकर घुमाया, लेकिन मुख्य आरोपी मुईन कुरैशी जैसे अपराधियों पर पहले से कई मामले दर्ज होने के बावजूद कोई स्थायी कार्रवाई नहीं हुई। मंडला के नैनपुर में मई 2025 में चार गायों का वध किया गया, जो मुख्यमंत्री के गृह जिले उज्जैन सहित पूरे प्रदेश में फैले हुए हैं। डॉ. चौधरी ने आरोप लगाया कि गोवंश संरक्षण वर्ष 2024-25 की थीम केवल प्रचार तक सीमित है; हकीकत में गोवंश संकट में फंस चुका है। भाजपा सरकार गोमाता के नाम पर वोट बटोरती है, लेकिन इन क्रूर घटनाओं पर चुप्पी साध लेती है, जो उनकी दोहरी नीति का प्रमाण है। यह सब तब हो रहा है, जब मुख्यमंत्री खुद को गोभक्त बताते हैं, लेकिन उनके शासन में गोहत्या बढ़ती जा रही है।

गौशालाओं की स्थिति तो और भी दयनीय है, जो सरकार की नीतियों की असफलता का जीता-जागता सबूत है। मार्च 2025 के पशु गणना आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में मध्यप्रदेश में गोवंश की संख्या में 43.76% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। अप्रैल 2025 में सरकार ने गौशालाओं को प्रति गाय 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रतिदिन का अनुदान घोषित किया था, लेकिन जून 2025 तक आयोजित प्रदेश स्तरीय गौशाला सम्मेलन के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ। टीकमगढ़ जिले में गौशालाएं कमाई का अड्डा बन गई हैं, जहां गोवंश की हालत बद से बदतर है। समस्त प्रदेश में सड़क पर घूमते गोवंश की गौशालाएं बनाई गईं, जिससेआएदिनसड़कदुर्घटनाओं में इंसान और पशु दोनों हताहत हुए जाते हैं। डॉ. चौधरी ने कहा कि स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना नीति-2025 के दावे हवा-हवाई हैं; चारे की कमी, अपर्याप्त देखभाल और निराश्रित गोवंश की समस्या से गौशालाएं जूझ रही हैं। अनुदान का पारदर्शी उपयोग नहीं हो रहा, जो भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। मुख्यमंत्री को इन गौशालाओं का दौरा करना चाहिए, लेकिन वे पूजा-पाठ में व्यस्त हैं, जो उनकी राजनीति को दर्शाता है।

इन सबके बीच, गो मांस पर 0% जीएसटी लगाने का फैसला भाजपा सरकार सबसे बड़ा मज़ाक है। यह नीति सीधे तौर पर गोहत्या को बढ़ावा देती है, क्योंकि इससे गो मांस का व्यापार सस्ता हो जाता है। डॉ. चौधरी ने तीखी आलोचना करते हुए कहा कि गो मांस पर जीएसटी शून्य करना भाजपा की दोहरी नीति उजागर करता है – एक तरफ वोट के लिए गोवर्धन पूजा का ढोंग, दूसरी तरफ व्यापार के लिए हत्या को प्रोत्साहन। मुख्यमंत्री मोहन यादव की चुप्पी इस मामले में शर्मनाक है, क्योंकि वे खुद को हिंदुत्व के पैरोकार बताते हैं, लेकिन ऐसी नीतियों से गोमाता का अपमान कर रहे हैं। जब प्रदेश गोवंश संकट से जूझ रहा है, तब मुख्यमंत्री ने भोपाल के रवीन्द्र भवन में राज्य स्तरीय गोवर्धन पूजा कार्यक्रम का शुभारंभ किया, साथ ही उज्जैन की तिलकेश्वर गौशाला में पूजा की और हर घर-हर गौशाला में पूजा का आह्वान किया। लेकिन डॉ. चौधरी ने इसे महज हिन्दुओं की भावनाओं का तुष्टीकरण मात्र है, यह वास्तविकता से छिपाने का इवेंट है। गोवर्धन पूजा गोमाता की रक्षा का प्रतीक है, लेकिन यहां यह केवल दिखावा बनकर रह गया है। सरकार की नीतियां कागजों तक सीमित हैं, जबकि हकीकत में गोवंश संकट में है।

कांग्रेस पार्टी इस स्थिति से बेहद चिंतित है और मांग करती है कि गोवंश तस्करी और हत्या के सभी मामलों में तत्काल विशेष जांच समिति गठित हो, जिसमें विपक्षी दलों की भागीदारी हो। गौशालाओं के लिए अनुदान का ऑडिट कराया जाए और गौ वंश गिरावट रोकने के लिए ठोस योजना लागू हो। गो मांस पर जीएसटी तत्काल वापस लिया जाए, ताकि हत्या को प्रोत्साहन न मिले। मुख्यमंत्री स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी हकीकत का जायजा लें और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करें। इसके अलावा, गोवंश संरक्षण के लिए एक स्वतंत्र आयोग का गठन हो, जो सालाना रिपोर्ट विधानसभा में पेश करे। डॉ. चौधरी ने अंत में कहा कि भाजपा सरकार गोमाता के नाम पर वोट लेती है, लेकिन रक्षा में असफल है। कांग्रेस गोवंश संरक्षण को प्राथमिकता देगी और जनता के साथ मिलकर इस लड़ाई को लड़ेगी। यह समय है कि सरकार अपनी जिम्मेदारी समझे और गोमाता की रक्षा के लिए वास्तविक कदम उठाए, वरना जनता इसका जवाब देगी।

डॉ विक्रम चौधरी ने मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि कॉंग्रेस प्रदेश की जनता के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और सामाजिक न्याय, पर्यावरण एवं पशु संरक्षण के मुद्दों पर सक्रिय है।

 

सादर प्रकाशनार्थ 

डॉ. विक्रम चौधरी, प्रवक्ता

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