बैतूल की पत्रकारिता पर धब्बा वसूलीबाजों ने चौथे स्तंभ को किया शर्मसार. अकरम खान पटेल की रिपोर्ट।
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कभी समाज का दर्पण कही जाने वाली पत्रकारिता आज बैतूल जिले में कुछ तथाकथित पत्रकारों की करतूतों से बदनाम होती जा रही है। हालात यह हैं कि कुछ लोग पत्रकार की आड़ में वसूली का धंधा खुलेआम चला रहे हैं। गांव–गांव जाकर ये नकली पत्रकार कभी आरटीओ अधिकारी बनते हैं तो कभी सरकारी जांच दल के सदस्य, और गरीब दुकानदारों से लेकर छात्रावासों तक से अवैध वसूली कर रहे हैं।
यह दुखद है कि पत्रकारिता, जो समाज के लिए आवाज़ उठाने का माध्यम है, वहीं कुछ लोग उसी मंच का इस्तेमाल अपनी जेब भरने के लिए कर रहे हैं। बताया जाता है कि कुछ ऐसे चेहरे भी हैं जिन पर पहले से गंभीर आरोप हैं और जिला बदर की फाइलें महीनों से लंबित पड़ी हैं। सवाल उठता है — आखिरकार कार्रवाई में देरी क्यों? क्या इन लोगों को किसी का संरक्षण प्राप्त है?
अगर यही हाल रहा तो जनता का भरोसा पत्रकारिता से उठ जाएगा। जो पत्रकार समाज के हित में कलम चलाते हैं, वे भी इन नकली चेहरों की वजह से संदेह के घेरे में आ रहे हैं।
ऐसे “वसूलीबाज पत्रकारों” को पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी है, वरना बैतूल की पत्रकारिता पर लगा यह दाग मिटना मुश्किल होगा।
समाज का चौथा स्तंभ तभी मजबूत रहेगा, जब उसमें बैठे लोग ईमानदार रहेंगे। पत्रकारिता सेवा है, सौदा नहीं — इसे समझना और सिखाना अब वक्त की मांग है।
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