भारत महिला क्रिकेट का विश्व चैम्पियन बना,,पुरा देश जश्न मना रहा,मनाना भी चाहिए,,मारी बेटी भी छोरो से कम नाही तो मारो छोरों भी खिलाड़ी भावनाओं को अंगीकार करने की,प्रमोद कुमार व्दिवेदी एड्वोकेट,
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जिस देश में कुल 0,01फीसदी महिलाओं को हम खेलते हुए देखते हो,खेल मैदान नहीं संसाधन नहीं और फिर रोजगार नहीं, सामाजिक, पारिवारिक प्रोत्साहन नहीं उस देश में पहले हांकी में महिला टीम विश्व चैंपियन बनती है,,,,,,अब क्रिकेट में,,।
हरियाणा की बेटियां कुस्ती में नाम कमाती है विश्व चैंपियन भी बनती अगर खेल ना होता,,
बांक्सिग में,तैराकी, तीरंदाजी, एथेलेटिक्स, आदि में भी हम उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रहे,,
आज उत्सव मना रहे समाज,देश और अपने आप से सवाल
केवल और केवल 0.01फीसदी महिलाएं,बेटी, युवती खेल मैदान पर कामयाबी का इतिहास रच रही,,,कुल आबादी का पुरुष वर्ग भी2%केवल दो फीसदी खेल मैदान पर खेलते हुए नजर आता है, उसपर हम कामयाबी हासिल करते हैं।
जिस देश में खेल संगठनों पर राजनेताओं एवं धनपतियों का कब्जा हो,,जिस देश में अपना तुपना,जाति,भाषा, क्षैत्र वाद चलता हो, संकीर्ण मानसिकता सोच चलता हो उस देश में यह उपलब्धि हासिल करना मायने रखता है।
आज संकल्प लेने की आवश्यकता है,खेल, खिलाड़ी एवं खेल मैदान बचाने की खिलाड़ियों को रोजगार मिले इसकी,,
क्या हम आगे बढ़ेंगे,,बेटी बेटों से कम नहीं कारण समझेंगे,बेटा भी कम नहीं सोच रखेंगे,,,।
खिलाड़ी आसमान से नहीं आते घर घर से चुनकर आए 0, 01फीसदी में शैफाली,हरमित,घोष आदि निकल रही है तो आप सोचिए अगर 20%या 10%आबादी खेले तब,,
पुरुष वर्ग में भी अगर खेल मैदान पर 10से20%खिलाडी खेल मैदान पर उतरे तो,,
आज सवाल उठाया जाना चाहिए मप्र में सरकार से कि विगत कुछेक सालों में 2000से अधिक खिलाड़ियों ने प्रदेश क्यों छोड़ा नोकरी नहीं मिली इसलिए 150से अधिक और कतार में खड़े है प्रदेश छोड़ने में,
मीर रंजन नेगी सड़क पर हांकी सिखा रहे क्यों खेल मैदान नहीं इसलिए,,
हेप्पी बांड्सस आदि के खेल मैदान पर मेट्रो स्टेशन बन रहा क्यों,,
राजबाड़ा पर उत्सव मनाया अब तिरंगा अपने मन में उतार लो,,,घर घर से प्रतिभा तलाशों,,,खेल मैदान में उतारों,,
गोफन चलाने वाले हाथ हो,,, बाढ़ में भी या एक सिक्के खातिर नदी में कुदकर सिक्का ले आने वाले बच्चे युवक सोना ला सकते हैं,,गाय ढोर पहाड़ी पर चराने वाले,,, भी,, तो तीरंदाजी से लेकर योग तक में,मलखम अखाड़े में से लेकर विश्व पटल तक,,,, सड़कों पर चंद सिक्के पर मौत का खेल दिखाने वाले,करतब दिखाने वाले,पेट खातिर क्या क्या नहीं करने वाले तबके को सहेज कर आगे बढ़ायें तो,,,
आइये संकल्प लें खेल खिलाड़ी खेल मैदान बचाने का,, खिलाड़ियों को रोजगार मिले इसका समाज में दकियानूसी सोच खत्म हो,,,,मारी बेटी भी छोरो से कम नाही तो मारो छोरों भी खिलाड़ी भावनाओं को अंगीकार करने की,,
सच्ची खुशी यह रहेगी बधाई यह रहेगी,,,।
फिर एक बार बधाई बधाई बधाई और
तिरंगा फहराता रहे।
फहराता रहे हर खेल में मैदान में और विश्व चैंपियन बनते रहे बनते रहे।
जयहिंद, जयहिंद, जयहिंद
आपका,,,
- प्रमोद कुमार व्दिवेदी एड्वोकेट.
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