मध्यप्रदेश के उज्जैन में प्रशासन ने अवैध निर्माणों के विरुद्ध बड़ी कार्यवाही करते हुए अब तक कुल 27 मकानों को ध्वस्त किया। आजम खान की विशेष ख़बर
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*उज्जैन विकास प्राधिकरण के स्वामित्व के 03 भूखंड से अवैध निर्माण हटाए गए*
*हरिफाटक ब्रिज मार्ग चौड़ीकरण के अंतर्गत कार्यवाही की गई*
उज्जैन 05 नवंबर। बुधवार को जिला प्रशासन, नगर पालिका निगम और उज्जैन विकास प्राधिकरण की संयुक्त टीम के द्वारा हरिफाटक ब्रिज मार्ग चौड़ीकरण के अंतर्गत बेगम बाग के समीप उज्जैन विकास प्राधिकरण के स्वामित्व के भूखंड से अवैध निर्माण हटाए जाने की कार्यवाही की गई।
कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह ने जानकारी दी कि हरि फाटक ब्रिज के चौड़ीकरण कार्य का टेंडर हो चुका है। माननीय न्यायालय से प्राप्त आदेश अनुसार उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा अवैध निर्माण हटाए जाने की कार्यवाही विधिवत की जा रही है, ताकि मार्ग चौड़ीकरण कार्य में प्रगति हो सके। इसी क्रम में बुधवार को बेगम बाग के समीप प्राधिकरण के स्वामित्व के 03 भूखंड से 12 अवैध भवन हटाए जाने की कार्यवाही की गई है ।
कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि इंदौर उज्जैन मार्ग के चौड़ीकरण के अंतर्गत फोरलेन से सिक्स लेन किया जा रहा है। आने वाले समय मे श्री महाकाल मंदिर तक सुगम पहुँच के लिए हरीफाटक मार्ग को मुख्य पहुँच मार्ग के रूप में उपयोग किया जाना प्रस्तावित है। साथ ही हरि फाटक ब्रिज के समानांतर ब्रिज बनाया जाएगा। वर्तमान में यह पुल 2 लेन का है, जिसके पास ही 4 लेन का नया मार्ग बनाया जाएगा। यह विकास कार्य आने वाले समय में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। इसके आगे 24 मीटर की रोड का चौड़ीकरण भी किया जाएगा।
इस दौरान यूडीए सीईओ श्री संदीप सोनी एवं नगर निगम आयुक्त श्री अभिलाष मिश्रा उपस्थित थे।
शहर में प्रशासन ने अवैध निर्माणों के विरुद्ध बड़ी कार्यवाही करते हुए अब तक कुल 27 मकानों को ध्वस्त किया है। अधिकारियों का कहना है कि ये सभी मकान नियमानुसार स्वीकृति और अनुमति के बिना बनाए गए थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आगे भी ऐसी कार्यवाही जारी रह सकती है।
प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने मकानों से संबंधित रजिस्ट्री, नामांतरण, टैक्स रिकॉर्ड और नगर निगम के स्वीकृति पत्रों को समय रहते सत्यापित करवा लें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिन लोगों के मकान तोड़े गए हैं, वे आर्थिक और मानसिक रूप से बेहद परेशान हैं। कई लोगों ने बताया कि मकान बनाने में जीवनभर की जमा पूंजी लगी थी, परंतु कागजात में त्रुटि या अनजान नियमों की वजह से उनका आशियाना उजड़ गया।
यह घटना एक गंभीर सवाल खड़ा करती है क्या इस स्थिति के लिए जिम्मेदार केवल मकान मालिक हैं या व्यवस्था की जटिल प्रक्रियाएँ भी इसका हिस्सा हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि जनता को निर्माण से पहले संपत्ति के कानूनी दस्तावेजों की पूरी जांच करनी चाहिए और आवश्यक स्वीकृति प्राप्त करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी परेशानी से बचा जा सके।
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