भक्ति, ज्ञान, वैराग्य एवं त्याग की प्रेममयी कथा का नाम है श्रीमद् भागवत कथा, रीपोर्ट मनोहर मालवीय।
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श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस का आयोजन आज अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और शांति के वातावरण में संपन्न हुआ। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने भाव-विभोर होकर कथा श्रवण किया।
कथा प्रवक्ता पूज्य श्री सुनीलकृष्ण जी व्यास (बेरछा वाले) ने द्वितीय दिवस के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि “श्रीमद् भागवत कथा केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और त्याग की प्रेममयी धारा है।”
उन्होंने गोपी गीत का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि “गोपी गीत श्रीमद् भागवत कथा का प्राण है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के प्रति गोपियों का निष्काम, निश्छल और सर्वोच्च प्रेम प्रकट होता है।”
पं. व्यास ने राजा परीक्षित के जन्म का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार उत्तरा के गर्भ की रक्षा स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने की और वहीं से राजा परीक्षित का जन्म हुआ, जो आगे चलकर श्रीमद् भागवत कथा के महान श्रोता बने।
द्वितीय दिवस की आरती एवं प्रसादी के यजमान श्री रामलाल जी पांचाल (झुटावद वाले), श्री दिलीप जी पांचाल, श्री धर्मेंद्र जी पांचाल, श्री मुकेश जी पांचाल एवं पांचाल परिवार रहे। यजमानों द्वारा श्रद्धा भाव से आरती एवं प्रसादी का आयोजन किया गया।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लिया और पूरा वातावरण भक्ति रस से सराबोर हो गया। द्वितीय दिवस की कथा ने श्रोताओं के हृदय में भक्ति और वैराग्य की गहरी छाप छोड़ी। श्रीमद् भागवत कथा में सभी नगर वासीयों ने उपस्थित होकर धर्म लाभ प्राप्त किया उक्त जानकारी नगर के सामाजिक कार्यकर्ता सचिन भंडारी ने दी
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