श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस का आयोजन गहन आध्यात्मिक वातावरण एवं भावपूर्ण श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर कथा श्रवण का पुण्य लाभ लिया
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गुरु की दृष्टि अगर शिष्य पर पड़ती है तो पूरी सृष्टि बदल जाती है
रीपोर्ट मनोहर मालवीय
श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस का आयोजन गहन आध्यात्मिक वातावरण एवं भावपूर्ण श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर कथा श्रवण का पुण्य लाभ लिया।
कथा प्रवक्ता पूज्य श्री सुनीलकृष्ण जी व्यास (बेरछा वाले) ने अपने ओजस्वी प्रवचनों में कहा कि “जब गुरु की दृष्टि शिष्य पर पड़ती है, तब शिष्य की पूरी सृष्टि बदल जाती है।” उन्होंने यह भी कहा कि जीवन में विश्वास और सरलता के साथ जीना ही सच्ची साधना है। उन्होंने मन की शांति पर विशेष बल दिया।
तृतीय दिवस में सुखदेव जी के आगमन, विदुर नीति, ध्रुव चरित्र, शिव चरित्र एवं नरसिंह अवतार जैसे प्रेरक और भावपूर्ण प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया गया। राजा दक्ष द्वारा शिवजी अपमान के प्रसंग के माध्यम से अहंकार के दुष्परिणामों को समझाया गया, वहीं ध्रुव चरित्र ने अटूट भक्ति और विश्वास की शक्ति को उजागर किया। नरसिंह अवतार के वर्णन ने यह संदेश दिया कि भगवान अपने भक्त की रक्षा के लिए स्वयं प्रकट होते हैं।
तृतीय दिवस की आरती एवं प्रसादी के यजमान श्री गणपतलाल जी, श्री भँवरलाल जी चौधरी एवं समस्त चौधरी परिवार रहे। यजमान परिवार द्वारा श्रद्धा भाव से आरती एवं प्रसादी का आयोजन किया गया।
कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर दिखाई दिए और संपूर्ण वातावरण भक्ति, विश्वास और वैराग्य से ओतप्रोत हो गया। तृतीय दिवस की कथा ने यह संदेश दिया कि सच्चे भरोसे और समर्पण से ही भगवान की प्राप्ति संभव है। श्रीमद् भागवत कथा के मंगलकारी अवसर पर नगर के सभी श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्म लाभ प्राप्त किया उक्त जानकारी नगर के सामाजिक कार्यकर्ता सचिन भंडारी ने दी
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