किस्मत न्यूज़ बैतूल.जयस निकालेगा वन अधिकार यात्रा. सामुदायिक वन अधिकारों के हनन का आरोप. अकरम खान पटेल की रिपोर्ट।
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किस्मत न्यूज़ बैतूल. जयस संगठन द्वारा बैतूल जिले में वन अधिकार यात्रा आयोजित करने की घोषणा की गई है। इस यात्रा का उद्देश्य जिले के ग्रामों में वन अधिकार कानून 2006 के तहत दिए गए अधिकारों के क्रियान्वयन में हो रही अनदेखी और सामुदायिक भूमि को आरक्षित वन घोषित करने की कथित साजिश के खिलाफ जनजागरूकता फैलाना है। जयस का आरोप है कि शासन के आदेशों के बावजूद जिला प्रशासन और राजस्व विभाग द्वारा कोई ठोस कार्यवाही नहीं की जा रही है।
– शासन आदेशों को दबाने का आरोप
जयस प्रभारी महेश शाह उइके एडवोकेट ने बताया कि प्रमुख सचिव ओ.पी. रावत द्वारा 10 जून 2008 को बड़े झाड़ और छोटे झाड़ के जंगल मद में दर्ज लगभग 1 लाख 50 हजार हेक्टेयर भूमि पर सामुदायिक वन अधिकार दिए जाने का स्पष्ट आदेश जारी किया गया था, लेकिन जिला प्रशासन एवं राजस्व विभाग ने इस आदेश को दबाकर रखा और आज तक अमल नहीं किया।
– वर्किंग प्लान में अवैध शामिल करने का मामला
उन्होंने कहा कि बैतूल जिले के 455 राजस्व ग्रामों की 74 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि को वन विभाग ने बिना किसी विधिवत आवंटन के वर्किंग प्लान में शामिल कर लिया। इन जमीनों की प्रविष्टि जानबूझकर खसरा पंजी में दर्ज नहीं की गई और अब इन्हें आरक्षित वन घोषित करने की कार्यवाही टी.एल. प्रकरणों के माध्यम से की जा रही है।
– 2015 के आदेश की भी अनदेखी
महेश शाह उइके ने बताया कि आयुक्त आदिवासी विकास भोपाल द्वारा 16 अप्रैल 2015 को समाज के अधिकारों को मान्यता देने संबंधी स्पष्ट आदेश जारी कर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन आज तक किसी भी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं की। उल्टा वही अधिकारी इन जमीनों को आरक्षित वन बनाने की प्रक्रिया चला रहे हैं।
– भू-राजस्व संहिता के उल्लंघन का आरोप
जयस का आरोप है कि मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 237(3) के उद्देश्यों से हटकर निस्तार पत्रक की सार्वजनिक प्रयोजन की जमीनों को धारा 237(4) का उल्लंघन कर बड़े पैमाने पर आवंटित किया जा रहा है। नियमानुसार पहले निजी भूमि अर्जित कर ग्रामसभा को निस्तार हेतु सौंपना आवश्यक है, लेकिन जिले में यह प्रक्रिया एक भी प्रकरण में नहीं अपनाई गई।
– सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
जयस संगठन लगातार गांव-गांव जाकर ग्रामीणों से चर्चा कर रहा है। संगठन ने स्पष्ट किया कि वन अधिकार यात्रा के साथ-साथ संविधान, कानून और उच्चतम न्यायालय के आदेशों की अवमानना को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।
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