*अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक मुरारी बापू से डाॅ. वाधवानी ने की मुलाकात: वृद्धाश्रम कम करने हेतु सामाजिक संदेश देने का किया आग्रह* जबलपुर. देश में बढ़ते वृद्धा आश्रम
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इस बात के गवाह हैं कि युवा पीढ़ी माता पिता व परिवार के अन्य बुजुर्गों को बोझ समझने लगी है और अपनी जिम्मेदारी से बचने उन्हें आश्रमों में छोड़ देती है. युवा पीढ़ी का यह कदम ना सिर्फ मानवीय बल्कि भारतीय संस्कृति के खिलाफ है. इसी मसले को लेकर मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन के अध्यक्ष डॉ. अजय वाधवानी ने प्रसिद्ध कथावाचक मुरारी बापूजी से चर्चा की. और उनसे आग्रह किया कि वह अपनी कथाओं के दौरान युवा पीढ़ी को इस बात के लिए प्रेरित करे कि माता पिता बुजुर्ग बोझ नहीं बल्कि उनके सच्चे पथ प्रदर्शक हैं, मार्गदर्शक हैं. और उनकी सेवा किसी उपासना से कम नहीं है. मुरारी बापू ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए कहा कि वे अपनी आगामी कथाओं में माता-पिता की सेवा, पारिवारिक संस्कार और बुजुर्गों के सम्मान पर विशेष संदेश देंगे, ताकि समाज में सकारात्मक परिवर्तन आ सके. इस अवसर पर डाॅ. अशोक
मेथवानी, एड. आशीष त्रिपाठी, एड. भावना निगम ,डाॅ. अभिषेक जैन आदि उपस्थित थे.
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