उज्जैन.पूर्व डिप्टी कमिश्नर रेलवे. हाजी नियाज मोहम्मद शेख: “ईमानदारी, शिक्षा और राष्ट्रप्रेम ही असली पहचान”
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किस्मत न्यूज़ संपादक सय्यद आशिक अली की विशेष चर्चा पूर्व डिप्टी कमिश्नर के साथ.
उज्जैन, [आज की तारीख]: सेवानिवृत्त डिप्टी कमिश्नर हाजी नियाज मोहम्मद शेख ने अपने प्रेरक जीवन यात्रा और अनुभवों पर प्रकाश डालते हुए समाज को महत्वपूर्ण संदेश दिए हैं। उन्होंने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि रिटायरमेंट के बाद अब उनका दिन परिवार और धार्मिक गतिविधियों में बीतता है, जहाँ उन्हें सुकून मिलता है।
जीवन यात्रा और चुनौतियाँ:
एक किसान परिवार से निकलकर अफसर बनने के सफर को उन्होंने ईश्वर की मेहरबानी और कड़ी मेहनत का फल बताया। उनका कहना था कि, “आर्थिक और सामाजिक चुनौतियाँ थीं, लेकिन परिवार के सहयोग और शिक्षा के प्रति लगन ने रास्ता आसान किया।”
सेवा और अनुभव:
अपनी सेवाकाल के दौरान लिए गए मुश्किल फैसलों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश और नियमों को हमेशा प्राथमिकता दी। 1971 के युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने युवाओं को एकजुटता, साहस और राष्ट्रप्रेम की सीख लेने की प्रेरणा दी। ईमानदारी पर कभी समझौता न करने के अपने सिद्धांत पर वह अटल रहे, क्योंकि उनके लिए “ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।”
समाज और शिक्षा पर विचार:
आज के समाज में धैर्य और सहिष्णुता की कमी को उन्होंने सबसे बड़ी चिंता बताया। मुस्लिम समाज में सुधार के लिए उनकी पहली सलाह “शिक्षा, शिक्षा और केवल शिक्षा” है, खासकर बेटियों की शिक्षा पर उन्होंने जोर दिया। मंदिर और मस्जिद से जुड़ाव को वह इंसानियत और भाईचारे का प्रतीक मानते हैं, जहाँ “ईश्वर एक है, और सबका सार प्रेम व सद्भाव है।”
युवाओं के लिए संदेश:
युवाओं को शॉर्टकट से बचने और सोशल मीडिया पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा, “सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवा ईमानदारी से मेहनत करें और नैतिकता का साथ कभी न छोड़ें।” सफलता और पैसे के संतुलन पर उन्होंने कहा कि पैसा साधन है, लक्ष्य नहीं; सच्ची सफलता नैतिक मूल्यों के साथ पैसा कमाने में है।
अंतिम अपील:
हाजी नियाज मोहम्मद शेख ने अपने जीवन की सबसे बड़ी सीख ईमानदारी, कड़ी मेहनत और दूसरों के प्रति दया के भाव को बताया। वह चाहते हैं कि लोग उन्हें एक ऐसे इंसान के तौर पर याद रखें, जिसने ईमानदारी और निष्ठा से काम किया और दूसरों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहा।
देश और समाज के लिए उनकी अंतिम अपील है: “हम सब मिलकर एक मजबूत, शिक्षित और शांतिपूर्ण समाज का निर्माण करें।” आने वाली पीढ़ी के लिए उनका एक वाक्य का संदेश है: “शिक्षित बनो, ईमानदार रहो और अपने देश से प्रेम करो, क्योंकि यही तुम्हारी असली पहचान है।”
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