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*,,,,,,,,,, ✍️मुर्दे की तमन्ना,,,,,,,*

*लोग कब्रस्तान मे एक मय्यत को दफ़न करके फ़ारिग़ ही हुए थे तभी एक बड़े मियां क़रीब आकर खड़े हो गए
और दफ़न मे शरीक तमाम लोगों से पूछने लगे*

*,,भाईयो,बताओ कि अगर ये शख़्स जिसे अभी तुमने सुपुर्दे खाक किया है
अगर ये अभी दुनिया मे वापस आ जाए तो ये क्या करेगा,,*

*बड़े मियां के इस सवाल पर एक दफा तो सबको झटका लगा
कि आखिर ये बड़े मियां क्या कहना चाहते हैं,
बड़े मियां ने सबको ताज्जुब मे देख कर फ़रमाया*

*,, भाईयो, मैं एक इन्सान ही हूं
मेरा सवाल बहुत आसान है
और कोई मेरे सवाल का जवाब देना पसन्द करेगा कि ये मुर्दा शख़्स जिसे आपने अभी अभी दफ़न किया है
अगर ये दुनिया मे वापस आ जाए तो ये क्या करेगा,
आप लोग मेरे सवाल का जवाब दीजिए,,*

*एक दो आदमी हम आवाज़ हो कर बोले,
नेक काम करेगा अच्छे काम करेगा,
इतने मे पीछे से भी कुछ आवाज़ें आने लगीं
जैसा कि मजमे मे आम तौर से होता है
कि जब एक आदमी बोलता है
तो फिर सब अपनी अपनी राय देने लगते हैं,
एक आवाज़ बड़े मियां के कान मे पहुंची कि,,
ये दीन का काम शुरू कर देगा,,*

*एक आवाज़ ये भी आई कि,,
ये क़ुरआन ओ सुन्नत पर अमल करेगा,,*

*अभी जवाबों का ये सिलसिला चल ही रहा था
कि बड़े मियां बोले कि,,,*

*मैंने आप मे से बहुत से लोगों के जवाब सुने
लेकिन सबके जवाबों और सबकी बातों का ख़ुलासा और निचोड़ यही है
कि ये दुनिया मे वापस आकर अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की इताअत और फ़रमा बरदारी करेगा
और ज़िन्दगी मे कभी ना फ़रमानी नहीं करेगा*

*लेकिन मेरे भाईयो,
अब ये कभी भी अपनी क़ब्र से निकल कर दुनिया मे वापस नहीं आएगा,
हां तुम लोग अभी अपनी अपनी क़बरों से बाहर हो

इस*
लिए ये नेक काम करने का मौक़ा अभी तुम्हारे पास है
इस लिए तुम अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की इताअत और फ़रमा बरदारी के वो काम कर लो जो ये अपनी क़ब्र से बाहर निकल कर करना चाहता है,,,*

*मेरे भाईयो देखने मे तो तुम्हारे और इस मय्यत के दरमियान दो चार फिट का फ़ासला है
कि ये क़ब्र के अन्दर है
और तुम क़ब्र के बाहर हो
मगर दर हक़ीक़त ये बहुत बड़ा फासला है,*

*ये बातें कह कर बड़े मियां ने सलाम किया और वहां से चले गए लेकिन क़ब्र के पास खड़े हर शख़्स पर कंपकपी तारी हो गई
और वहां मौजूद हर शख़्स की ज़बान पर अपने गुनाहों से*

*अस्तग़फ़ार और आंखों से आंसू जारी थे*

*काश हमें भी किसी जनाज़े से ऐसी इबरत हासिल हो जाए
और अपनी ज़िन्दगी की गाड़ी सही डगर पर आ जाए,
हम भी परवरदिगार-ए-आलम के सामने सच्ची तौबा करें,
और अपनी आख़िरत को संवारने मे लग जाएं*

*दुआ है अल्लाह तआ़ला हम सबको नेक अमल की तौफीक अता फरमाए….*
*हम सबके कारोबार में, रिज्क में बुसअतें अता फरमाए तमाम जमीनी आसमानी बलाओं से हम सबकी हिफाजत फरमाए*
*आमीन या रब्बुल आ़लमीन….*

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