घोंसला में लगता हे बेहद बड़ा पशु हाट अलग-अलग किस्म की भैंस के लिए प्रसिद्ध है पशु हाट में सालों से इसी तरह से सौदे होते आए हैं। अगर किसी को पशु खरीदना है, तो उसे दलाल की मदद लेना पड़ता है।
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उंगलियों पर चलने वाले अनूठे पशु बाजार की कहानी:गमछे में छुपी उंगलियां दबाकर कराते हैं लाखों के सौदे; लट्ठा, इकला, मुन्नी जैसे कोडवर्ड बताते हैं कीमत, ताकि सौदा लीक न हो
राहुल कुमावत
घोंसला
उज्जैन जिले के घोंसला गांव में मध्यप्रदेश का दुसरा सबसे बड़ा पशुओं का बाजार लगता है। सोमवार को लगने वाले इस पशु हाट में हजारों पशुओं की खरीदी बिक्री होती है। इसकी खास बात यह है कि यहां लाखों के सौदे होते हैं, लेकिन किसी को पता नहीं चलता कि आखिर पशु का भाव कितना लगा है।
यहां पर बिना कुछ बोले मोल-भाव हाथों की उंगलियों के इशारों से होता है। हाथों को भी गमछे से ढंक कर रखते हैं। गमछे के नीचे उंगलियों को पकड़कर पशु की बिक्री की रकम तय हो जाती है। हाट की खास बात यह है कि पशुओं का सौदा गमछे की आड़ में हाथों के इशारों से होता है। जरूरी होने पर अगर कीमत बताना भी हो तो वह रुपए का मोल सिकारा, लट्ठा और असर जैसे शब्दों में बोलकर होता है। यहां पर रुपयों की गणना के लिए इन्हीं प्रचलित शब्दों का उपयोग किया जाता है।
पशु हाट में आस पास के क्षेत्रों सहित अलग अलग जिलों के पशु खरीदार आते हैं। –
अलग-अलग किस्म की भैंस के लिए प्रसिद्ध है पशु हाट में सालों से इसी तरह से सौदे होते आए हैं। अगर किसी को पशु खरीदना है, तो उसे दलाल की मदद लेना पड़ता है। यहां पशुओं का सौदा करवाने वाले कई दलाल मिल जाएंगे। प्रत्येक सोमवार को लगने वाले इस हाट बाजार में भैंस, बकरी जैसे दुधारू पशुओं के साथ बैल जैसे कृषि उपयोगी पशुओं के सौदे होते हैं।
अधिकांशतः दुधारू भैंस का बड़ा व्यापार होता है। घोंसला का पशु हाट भैंस की खरीदी-बिक्री के लिए मशहूर है। पशुओं की शारीरिक बनावट देखकर ही व्यापारी कीमत का अंदाजा लगा लेते हैं। पशु पसंद आने के बाद उंगलियों के इशारों में सौदा तय होता है।
दलाल सौदे के हिसाब से अपना कमीशन ले लेते हैं। इनका कोई कमीशन फिक्स नहीं होता है। –
उंगलियां पशुओं की कीमत तय करती हैं
भैंस व्यापारी प्रकाश शर्मा घोंसला और सुरेंद्र सिंह चरुड़ी ने बताया कि इस सौदे में दो व्यापारी या दलाल हाथों पर गमछा डाल कर एक-दूसरे की उंगलियों को पकड़ते और छोड़ते हैं। यही उंगलियां पशुओं की कीमत तय करती हैं। मवेशी काे देखकर लगता है कि वह एक लाख रुपए कीमत रखती है, ताे सौदे में केवल एक उंगली ही काफी होती है। वहीं, हाट में होने वाले सौदे पशुओं की क्वालिटी पर निर्भर होते हैं। यहां हुए सौदों में इतनी पारदर्शिता और विश्वसनीयता होती है कि गमछे की आड़ में तय हुए सौदे पर कभी किसी पक्ष ने सवाल नहीं उठाए। हाथों की सभी 10 उंगलियों की अपनी एक कीमत होती है, जिस पर पूरा हाट बाजार संचालित होता है।
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