ख़ूदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से पूछे बता तेरी रज़ा क्या है। अमल से ज़िंदगी बनती है,जन्नत भी जहन्नम भी; ये खाकी अपनी फितरत में न नूरी है न नारी है। अल्लामा इक़बाल ++++++++++++++ ” अनमोल मोती ” 🟢🟢🟢🟢🟢 Respected sisters and brothers, अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकतुल्लाह
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ख़ूदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से पूछे बता तेरी रज़ा क्या है।
अमल से ज़िंदगी बनती है,जन्नत भी जहन्नम भी;
ये खाकी अपनी फितरत में न नूरी है न नारी है।
अल्लामा इक़बाल
++++++++++++++
” अनमोल मोती ”
🟢🟢🟢🟢🟢
Respected sisters and brothers,
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकतुल्लाह।
” चल फक़ीरा, अकेला चल ”
वैसे तो इन जुमलों में इस क़ायनात की गहराई पोशीदा है।इब्ने आदम बस इतना याद रखे कि वह अकेला ही आया है,और अकेला ही जाना है।इस दौरान ऐ हयात हौसला कर अकेला ही चला था और कारवां बनता गया। तो जिनमें अकेला चलने का हौसला होता है,उनके पीछे एक दिन कारवां होता है।
इक़बाल “नूरानी ”
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Regards:Iqbal Khan Gauri,Retired District Judge,M.P.
Now:Law adviser and Human duties Activist,Ujjain.
🤲🤲❤️❤️🫂🫂🤝🤝🌹🌹🌹🌹🌹🌹
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