अल्लाह करीम सुबहाना तआला क़ुरआन मजीद मे फरमाते है कि हमने तुमको “उम्मत ऐ खैर”बनाया है।यह तसव्वुर भारतीय अवधारणा “आर्य जाति” समान ध्वनित होता है। Regards:Iqbal Khan Gauri,Retired District Judge,M.P. Now: law adviser & Human duties Activist,Ujjain. 🤲🤲❤️❤️🫂🫂🤝
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” फिक्र ऐ नूरानी “
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Respected sisters and brothers,
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकतुल्लाह।
” उम्मत ऐ खैर का तसव्वुर “
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अल्लाह करीम सुबहाना तआला क़ुरआन मजीद मे फरमाते है कि हमने तुमको “उम्मत ऐ खैर”बनाया है।यह तसव्वुर भारतीय अवधारणा “आर्य जाति” समान
ध्वनित होता है।
आर्य जाति की अवधारणा नस्ली श्रेष्ठता से ग्रस्त होकर अपनी भूमिका से सदियों पहले भटक गई है । उम्मत ऐ खैर का तसव्वुर नस्ली श्रेष्ठता के तसव्वुर का शिकार न होकर आज भी आमाल की बहतरी यानि कर्म की श्रेष्ठता के सिद्धांत पर क़ायम दायम है। हम मुसलमानों को हालाते हाज़रा का मुक़ाबला कर भावी पीढ़ी के लिए “दौर ऐ खैर ” की ताअमिर व तकमिल के लिए “उम्मत ऐ खैर”के तसव्वुर को समझकर अमलीजामा पहनाने की सख्त ज़रूरत है।
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Regards:Iqbal Khan Gauri,Retired District Judge,M.P.
Now: law adviser & Human duties Activist,Ujjain.
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