मतलब अमरीका फलस्तीन की आज़ादी में सबसे बड़ा रोड़ा है।सुत्र
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यूनाइटेड अरब अमीरात द्वारा फलास्तीन के लिए फुल मेंबर स्टेट का दर्जा दिलाने के लिए यूएनओ में लाया गया प्रस्ताव अमरीका द्वारा वीटो कर दिया गया है,,
मतलब अमरीका फलस्तीन की आज़ादी में सबसे बड़ा रोड़ा है।
हालांकि फलस्तीन के हक़ में वोटिंग करने वाले देशों की संख्या 143 थी जो कि संख्या के एतबार से बहुत बड़ी है,,
अमरीका इज़राइल समेत 9 मुल्कों ने फलस्तीन के विरोध में वोटिंग की और 25 मुल्क गैरहाजिर रहे,,
चेक रिपब्लिक, हंगरी और अर्जेंटीना भी नहीं चाहते कि फलस्तीन यूएनओ का फुल मेंबर बने और इन्होंने भी फलस्तीन के विरोध में वोट दिया,,
जबकि गैरहाजिर रह कर इज़राइल के साथ खड़े होने वाले मुल्कों में ब्रिटेन, नीदरलैंड ,जर्मनी, इटली,कनाडा,स्वीडन और स्विट्जरलैंड खास हैं।
जबकि फलस्तीन के हक में वोटिंग करने वालों में लगभग सारे अफ्रीकी मुल्क,सारे मुस्लिम मुल्क, भारत, रूस,चीन, ब्राजील, साउथ कोरिया, जापान,फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल, आयरलैंड, पोलैंड और दूसरे बहुत सारे मुल्क।
फ्रांस का फलस्तीन के हक में और अर्जेंटीना का इज़राइल के हक में आने के बहुत ठोस कारण है जिसपर मैं किसी दिन इंशा अल्लाह लिखूंगा,,
अर्जेंटीना पर आप शॉक्ड रह जायेंग
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