क्रांतिकारी*सरदार विष्णु सिंह गोंड मूर्ति स्थापना दिवस पर निकली ऐतिहासिक महारैली* – किस्मत न्यूज

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क्रांतिकारी*सरदार विष्णु सिंह गोंड मूर्ति स्थापना दिवस पर निकली ऐतिहासिक महारैली*

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50 हजार से अधिक आदिवासियों की भागीदारी, पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक धरोहर के साथ जिला मुख्यालय पर उमड़ा आदिवासी समुदाय। इस ऐतिहासिक रैली का जगह-जगह किया भव्य स्वागत। डीजे की आकर्षक धुन पर 

थिरके आदिवासी समुदाय के सदस्य। कोठी बाजार बस स्टैंड पर किया गया क्रांतिकारी सरदार विष्णु सिंह गोंड की प्रतिमा का अनावरण। ,     

 

बैतूल से किस्मत न्यूज़ ब्यूरो चीफ अकरम पटेल की रिपोर्ट

 

मध्य प्रदेश के जिला बैतूल से*

 आज 11 अगस्त रविवार को बैतूल जिले में सरदार विष्णु सिंह गोंड मूर्ति स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में एक ऐतिहासिक महारैली का आयोजन किया गया। इस महारैली में लगभग 50 हजार से अधिक आदिवासि शामिल हुए ।जो आदिवासी एकता और सांस्कृतिक धरोहर का भव्य प्रदर्शन किया। आदिवासी युवा शक्ति (जयस) द्वारा आयोजित इस आयोजन में आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी दिखाई दिए, जो इस रैली का मुख्य आकर्षण रहा। क्रांतिकारी 

सरदार विष्णु सिंह गोंड की प्रतिमा का पुनः अनावरण

जयस संगठन ने 11 अगस्त 2021 को कोठी बाजार बस स्टैंड पर क्रांतिकारी सरदार विष्णु सिंह गोंड की मूर्ति स्थापित की थी, और तब से हर वर्ष यह दिन मूर्ति स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष, जयस संगठन द्वारा इस मौके पर क्रांतिकारी सरदार विष्णु सिंह गोंड की एक बड़ी प्रतिमा पुनः स्थापित की गई।, जिसका अनावरण भी आज कोठी बाजार बस स्टैंड पर किया गया। रैली में शामिल होने वाले सभी आदिवासियों से आग्रह किया गया था कि वे अपने साथ डंडा और झंडे लेकर आएं। रैली के दौरान विभिन्न चौक-चौराहों पर सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा दिए जाने वाले उद्बोधन से आदिवासी समाज को जागरूक करने का प्रयास किया गया। 

जयस जिला अध्यक्ष संदीप कुमार धुर्वे ने बताया कि इस महारैली को लेकर पूरे जिले में उत्साह का माहौल है रैली की सफलता के लिए विगत कई दिनों से तैयारियां की जा रही थी। आदिवासी अंचलों में गांव-गांव में प्रचार-प्रसार के लिए विशेष रैली सॉन्ग का उपयोग किया गया। इस महारैली से आदिवासी समाज को एक नई दिशा और प्रेरणा मिली। जयस कार्यकर्ताओं की मेहनत और संगठन की तैयारी इस आयोजन को सफल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 50 हजार से अधिक आदिवासियों की उपस्थिति से यह रैली एक ऐतिहासिक रही है,।

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