शुभ दिवस ।इसके साथ ही गांधीजी व शास्त्रीजी जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं
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” राष्ट्रपिता के चिंतन का मर्म “💐💐💐💐💐💐 सम्मानीय आत्मजन,वर्तमान में,विश्व मे भारत के सम्मान व गौरव को अक्षुण्ण बनाऐ रखने में गांधी दर्शन व चिंतन का अमूल्य योगदान रहा है और सदैव रहेगा ।मानवतावाद ही गांधी चिंतन का मर्म है।मनुष्य की प्रथम व प्राथमिक प्राकृतिक पहचान उसका मनुष्य होना ही है ।मनुष्य की अन्य पहचाने सांसारिक होकर सांसारिक प्रयोजनों के लिए हैं।वास्तव में मनुष्य की सांसारिक पहचानें सुविधा व वर्गीकरण के सिद्धांत पर आधारित होकर मनुष्य जीवन के परम व अंतिम उद्देश्य व लक्ष्य ” मनुष्य से मानव बनकर व्यक्तिगत स्तर पर लौकिक व पारलौकिक सफलता प्राप्त करना व सामाजिक स्तर पर स्वर्ग का राज्य धरती पर स्थापित करना ” हैं।समस्त धर्मों की केन्द्रीय विषय वस्तु आदर्श मनुष्य व आदर्श मनुष्य समाज का निर्माण रहा हैं । समस्त धर्मों के मानवीय मूल्य सर्वकालीन व सार्वभौमिक है । हमें अपने अपने धर्म के मानवीय मूल्यों को अंगीकार कर एक अच्छा व्यक्ति और नागरिक बनकर स्वयं का,देश और विश्व का कल्याण,उन्नयन और विकास का मार्ग प्रशस्त करनेकी भूमिका का निर्वहन करना है ।
गांधीजी ने सत्य के साथ प्रयोग कर मानवीय मूल्यों को स्थापित करने का प्रयास किया। मनुष्य जीवन का इतिहास इस सत्य को भी उदघाटित करता है कि नकारात्मक प्रवृत्तियों को सत्य स्वीकार नही होता है। गांधीजी अहिंसा के साधन से सत्य का अनावरण करते हुए स्वयं नकारात्मक शक्तियों की हिंसा का ग्रास बन वीरगति को प्राप्त हुऐ।हम भारतीयों का कर्त्तव्य है कि सर्वधर्म समभाव की वैदिक परम्परा के अनुरूप मानवीय सनातन मूल्यों पर आधारित गांधी चिंतन व चेतना को मूर्त रूप प्रदान कर हमारे देश की सुख,समृद्धि व उन्नयन के मार्ग को प्रशस्त कर विश्व गुरु बनकर विश्व का कल्याण व नेतृत्व करे।
संकल्पित मानवीय उदघोष: एक बने,नेक बने ।मानवीय गरिमा व गौरव के साथ स्वयं जीए व अन्यों को भी जीने दे और एकात्म मानवता वाद व वसुधैव कुटुंबकम् के दर्शन को मूर्त रूप प्रदान कर इस धरती को स्वर्ग बनाने में सहयोगी बने।
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Regards:Iqbal Khan Gauri,Retired District Judge,M.P.
Now:Law adviser & Human duties Activist,Ujjain.
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