नन्हे अब्दुल को इस बुलंदियों की ऊंचाई को छूने के इस अदम्य साहस हौसले को मेरा ओर रतलाम के सभी प्रेमीजनों का दिल से सलाम।✍️ *पत्रकार:- लियाकत अली मुन्शी – किस्मत न्यूज

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नन्हे अब्दुल को इस बुलंदियों की ऊंचाई को छूने के इस अदम्य साहस हौसले को मेरा ओर रतलाम के सभी प्रेमीजनों का दिल से सलाम।✍️ *पत्रकार:- लियाकत अली मुन्शी

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*●●नन्हे अब्दुल कादिर इंदौरी का कमाल●●*

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रतलाम रहवासी *अब्दुल कादिर इंदौरी* के बारे में एक जानकारी…

अब्दुल कादिर इंदौरी 8 साल की उम्र होगी तब ये अपनी बिल्डिंग की छत पर खेल रहा था तब पैर फिसलने से अपना संतुलन खो बैठा ओर अपने एक हाथ से हाई टेंशन वायर पकड़ लिया तो दूसरा हाथ फर्श पर होने से अर्थिंग मिलने पर दोनों हाथ करंट की चपेट में आ गए थे उसी वक़्त इन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया तब डॉक्टरों ने इनकी जान बचाने के लिये इनके माता- पिता को यही सलाह दी की अगर आपके बच्चे को बचाना हो तो इनके दोनों हाथो को काटने होंगे ईतना सुनते ही माता पिता को बहुत गहरा धक्का तो लगा ही साथ ही साथ सोच ये भी आ रही थी के फूल जैसा मासूम बच्चा अपनी जिंदगी बिना हाथ के कैसे निकालेगा खेर सब्र ऊपर वाला दे ही देता है।

अब अब्दुल कादिर भी अपने हाथों को गवाने के बाद मायूस हो चला था हिम्मत भी हार चुका था क्योंकि बचपन के खेलने कूदने के दिनों में दोनों हाथों का न होना अपने आप मे एक सदमा ही था इस मासूम के लिये लेकिन यहाँ इनकी माता फ़ातेमा बहन ने अपने बच्चे को इस ख़ौफ़नाक सदमे से उभारने के लिये अपने दोनों हाथ अपने बच्चे के कांधे पर रख दिए, न दिन देखा न रात हर पल इनके पीछे परछाई की तरहा लगी रही हाथों के न होने से पैरों से लिखना ओर दूसरे कामो को कैसे करना ये सिखाती रही मन मे बस यही हसरत लिये की बेटे के लिये कुछ ऐसा करे जिससे दुनिया मे इसका नाम रोशन हो तब इन्होंने पढ़ाई के साथ साथ अब्दुल कादिर को पेरास्वीमिंग जॉइन करवा दी दिन गुजरते गए और एक दिन ऐसा भी आया के अब्दुल कादिर नेशनल तैराक बनकर उभरने लगा ओर गोल्ड, सिल्वर मेडलों से अपने घर की दीवारे सजाने लगा लेकिन आज इस नन्हे अब्दुल ने नेशनल लेवल को पार कर इंटरनेशनल लेवल में पदार्पण कर मिस्र के काहेरो शहर में पेरास्वीमिंग में अपनी जीत का झंडा गाड़ते हुए एक स्वर्ण ओर एक सिल्वर पदक जीत कर अपने माता पिता का नाम रोशन करते हुए बोहरा समाज ,अपने देश,अपने रतलाम का भी नाम रोशन कर हम सभी को गर्व का एहसास दिलाया।

 मैडल जीतने के बाद अब्दुल कादिर इंदौरी ने मिस्र में रास- अल हुसैन के रोज़े मुबारक पर अपनी जीत पर शुक्र का सलाम पढ़ा और मौला हुसैन से जो हिम्मत मिली उसका भी शुक्र अदा किया।

नन्हे अब्दुल को इस बुलंदियों की ऊंचाई को छूने के इस अदम्य साहस हौसले को मेरा ओर रतलाम के सभी प्रेमीजनों का दिल से सलाम।✍️

*पत्रकार:- लियाकत अली मुन्शी खुलासा टु डे न्यूज चैनल जिला चीफ ब्यौरो ,रतलाम मध्यप्रदेश।*

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