गौमाता को राष्ट्र माता घोषित करे सरकार । रिपोर्ट मनोहर मालवीय
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“” पंडित राजेश अग्निहोत्री भागवताचार्य। मथुरा में कुसुम वाटिका कालोनी अन्तर्गत चल रही श्रीमद्भागवत कथा में सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पंडित राजेश अग्निहोत्री ने कहा कि जिस वृज में हमारे श्याम सुंदर भगवान ने गौमाता की सेवा की, गौचारण लीला की और गौपालन करने के कारण गोपाल कहलाए ,उसी वृज में गौमाताओं को कचड़े में अपना भोजन ढूंढना पड़ रहा है इससे बड़ी विडंबना क्या हो सकती है? हमारे सनातन धर्म में पहली रोटी किसी देवता की नहीं बल्कि गौमाता के लिए निकाली जाती थी आज गेट बन्द कालोनियों के प्रचलन से धीरे-धीरे घरों में गौमाता की पहली रोटी निकलनी भी बन्द हो गई। गौमाता का पालन करना लोगों ने बहुत कम कर दिया।लोग अधिक से अधिक गौमाता का पालन करें इसके लिए सरकार को कुछ कानून बनाने की आवश्यकता है। सरकार को चाहिए कि गौमाता की दशा को सुधारने के लिए कुछ महत्वपूर्ण योजना बनानी चाहिए जैसे कि गौमाता के गोबर और गोमूत्र से अधिक से अधिक प्रोडक्ट बनाएं जा सकते हैं इस पर सरकार को ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। गौहत्या बन्द हो इसके लिए लिए सरकार को गौमाता को राष्ट्र माता घोषित करना चाहिए।जब गौमाता खुशहाल होंगी तभी हमारा राष्ट्र भी खुशहाल होगा। कथावाचक ने उन लोगों की भी लताड़ लगाई जो गौमाता का दूध पीने के बाद गौमाता को डंडा खाने के लिए छोड़ देते हैं।जिस दूध पर गौमाता के बच्चे का अधिकार था उसको आपने पिया और जब गौमाता दूध देने में असमर्थ हो गईं तब आपने उनको भटकने के लिए छोड़ दिया।आपको शर्म आनी चाहिए। आजकल लोग कोठियों में कुत्ते को तो पाल सकते हैं परन्तु गौमाता को नहीं, यदि आप अपनी कोठी में नहीं पाल सकते हो तो गौशाला की एक गाय का खर्च उठाओ। गौमाता में तैंतीस कोटि देवताओं का निवास है यदि गौमाता की पूजा कर ली तो समझो सबकी पूजा कर ली
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