कुख्यात तस्कर बंशी गुर्जर एनकाउंटर मामले में आया नया मौड़, 16 साल बाद इस केस में मिली बड़ी सफलता, दिल्ली सीबीआई ने डीएसपी और सिपाही को दबोचा*
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नीमच। सीबीआई ने 16 साल पुराने फर्जी एनकाउंटर केस में डीएसपी ग्लैडविन एडवर्ड कार और एक प्रधान आरक्षक को गिरफ्तार किया है। दोनों पर 2009 में नीमच के कुख्यात तस्कर बंशी गुर्जर को एनकाउंटर में मारने का झूठा दावा करने का आरोप है। जबकि बंशी 2012 में उज्जैन के दानीगेट से जिंदा पकड़ा गया था।
हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई कर रही जांच
यह मामला हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई को सौंपा गया था। जांच दिल्ली की क्राइम यूनिट-1 कर रही है। मंगलवार को जांच अधिकारी ने दोनों को बयान के लिए बुलाया था। तीन घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तारी की गई। दोनों के मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। ग्लैडविन इस समय गुनौर (पन्ना) में एसडीओपी है। हांल ही में आरक्षक प्रधान का नीमच से उज्जैन स्थानांतरण हुआ था, लेकिन वह हाईकोर्ट ने स्टे लाकर नीमच में ही पदस्थ था।
एनकाउंटर का झूठा दावा करने पर गिरफ्तारी
गिरफ्तार किए गए दोनों व्यक्ति एनकाउंटर टीम के अहम सदस्य थे। टीम ने एनकाउंटर का दावा किया था। सीबीआई ने एक एएसपी और अन्य पुलिसकर्मियों को भी नोटिस भेजा था। एएसपी ने बयान देने से इनकार कर छुट्टी ले ली। नगरीय सीमा के एडिशनल सीपी (कानून) अमितसिंह ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि दोनों आरोपितों को सीबीआई ने गेस्ट हाउस में रखा है।
कुख्यात तस्कर है बंशी गुर्जर
बंशी गुर्जर नीमच जिले की मनासा तहसील के गांव नलवा का रहने वाला है और कुख्यात तस्कर है। 4 फरवरी 2009 को उसने राजस्थान पुलिस पर हमला कर साथी रतनलाल मीणा को छुड़ाया था। इसके बाद 7 फरवरी को नीमच पुलिस ने उसके एनकाउंटर का दावा किया। लेकिन 20 दिसंबर 2012 को उज्जैन पुलिस ने उसे दानीगेट से जिंदा पकड़ लिया। उस समय उज्जैन में उपेंद्र जैन आईजी थे। बंशी के साथ पकड़े गए घनश्याम ने ही उसके जिंदा होने की जानकारी दी थी। इसके बाद उज्जैन के गोवर्धन पंड्या ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की थी।
ऐसे हुआ था खुलासा
गौरतलब है कि 8 फरवरी 2009 को पुलिस ने कुख्यात तस्कर बंशी गुर्जर को एनकाउंटर में मार गिराने का दावा किया था, जबकि 20 दिसंबर 2012 को वह जिंदा पकड़ा गया था। पूर्व में मादक पदार्थ की तस्करी में फरार आरोपी घनश्याम धाकड़ निवासी मोतीपुरा (राजस्थान) भी जिंदा पकड़ा गया था। उसे भी सितंबर 2011 में एक सड़क हादसे में पुलिस ने मृत घोषित कर दिया था। घनश्याम ने ही बंशी गुर्जर के जिंदा होने का राज खोला था।
लंबी चली सीबीआई की जांच
कुख्यात तस्कर बंशी गुर्जर के फर्जी एनकाउंटर की जांच की सीबीआई कर रही है। हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ ने इसके आदेश दिए हैं। यह मामला गुजरात के सोहराबुद्दीन एनकाउंटर की तरह ही चर्चा में रहा था। उज्जैन के गोवर्धन पिता चंद्रनारायण पंड्या और नीमच निवासी मूलचंद खींची ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा था कि पुलिस ने निर्दोष को मारने की साजिश रची।
यह अधिकारी जांच की रडार पर
इस मामले में कई अधिकारी जांच के रडार पर हैं। इसमें तत्कालीन एसपी वेदप्रकाश शर्मा जो वर्तमान में रिटायर्ड हैं फिलहाल बाबा रामदेव की कंपनी का काम देखते हैं। उनके साथ ही अनिल पाटीदार जो अभी बड़वानी के एडिशनल एसपी हैं। विवेक गुप्ता जो पीथमपुर सीएसपी हैं और पूर्व में नीमच मेंं पदस्थ एसआई थे।। मुख्तयार कुरैशी एसीपी भोपाल, जो उस समय नीमच मेंं एसआई थे, यह सभी भी जांच के घेरे में हैं।
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