*तलाक़ की जिद पर अड़े दंपति,बिटिया की जिद पर साथ रहने को तैयार* – किस्मत न्यूज

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*तलाक़ की जिद पर अड़े दंपति,बिटिया की जिद पर साथ रहने को तैयार*

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“बैतूल से अकरम खान पटेल की रिपोर्ट

आमला आज नेशनल लोक अदालत में भावुक पल अपर जिला न्यायाधीश तपेश कुमार दुबे के न्यायालय मैं आया पिछले 3 वर्ष से अलग अलग रह रहे दंपति किसी भी कीमत पर साथ रहने को तैयार नहीं थे न्यायाधीश कुशाग्र अग्रवाल राहुल निरंकारी चारु व्यास वकील राजेंद्र उपाध्याय पवन मोखेडे मो शफी खान परमार सिंह कल्पेश माथनकर शिवम उपाध्याय रवि देशमुख के समझाने पर भी पति-पत्नी किसी बात को समझने को तैयार नहीं थे ,वह तलाक लेने की जिद पर अड़े हुए थे ,एक दूसरे के विरुद्ध शिकायतों की इतनी लंबी फेहरिस्त थी कि दोनों न्यायालय में भी एक दूसरे के खिलाफ पारिवारिक मतभेद निजी आरोप लगा रहे थे ।पति कहने लगा साहब पिछली बार भी तो लोक अदालत में आपके कहने पर मैं इसे अपने साथ ले गया था लेकिन यह बार-बार मायके चली जाती है, मनमर्जी करती है अलग रहने जी जिद करती है, पत्नी का कहना था कि मैं बच्ची की पढ़ाई के लिए आमला में किराए का मकान लेकर निवास कर रही हूं ,मेरे पति मेरा पालन पोषण नहीं करते और मेरे साथ मारपीट कर प्रताड ना देते हैं। 3 वर्ष से अलग रह रहे है किंतु बिटिया पूछती है पापा हमारे साथ क्यों नहीं रहते मुझे पापा मम्मी के साथ साथ रहना है ,न्यायालय में बच्ची की जिद पर न्यायाधीश गण ने कहा कि बिटिया के मन भावनाओ पढ़ाई पर पर आपके पारिवारिक विवादो का असर होगा । कितना लड़ोगे दंपति पुराने विवाद भूलकर साथ-साथ रहने के लिए तैयार हो गए ,पति बिटिया के लिए 3500 रुपए प्रति माह आर डी के माध्यम से जमा करने को तैयार हो गया ।दरअसल न्यायालय ने पति को पत्नी को साथ न रखने पर 3500 रुपए प्रतिमाह भरण पोषण धनराशि देने के आदेश दिए थे ,इस अवसर पर अधिवक्ता संघ आमला के अध्यक्ष केशोराव चौकीकर सचिव ब्रजेश सोनी ने बिटिया को स्कूल बैग और पानी की बोतल गिफ्ट कर नालसा और विधिक सेवा प्राधिकरण को धन्यवाद दिया की मध्यस्थता और सुलह कार्यवाही नेशनल लोक अदालत और न्यायाधीशों का पारिवारिक मामले को गंभीरता से सुनकर सुलह समझाइश से प्रकरण का निराकरण करना समाज के लिए बेहतर है ।नेशनल लोक अदालत में लगभग 250 केस सुलह समझौते के लिए रखे गए थे, जिसमें 88 विभिन्न मामलो का 4 खंड पीठ में निराकरण हुआ बड़ी संख्या में बैंक के ऋण वसूली के प्रकरण भी निराकृत हुए।

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