अनुसंधान  राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 दे रही है आपको शोध का अवसर, बनें अच्छे शोधार्थी  – किस्मत न्यूज

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अनुसंधान  राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 दे रही है आपको शोध का अवसर, बनें अच्छे शोधार्थी 

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✍️… धर्मेन्द्र यादव 

बड़वानी मप्र 

 

बड़वानी 11 मई 2025/ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत अनेक नए बदलाव हुए हैं। अब तीन साल के साथ ही चार साल के स्नातक कोर्स की भी सुविधा दी गई है। स्नातक चतुर्थ वर्ष के भी दो प्रकार हैं फोर्थ इयर ऑनर्स और फोर्थ इयर ऑनर्स विद रिसर्च, दोनों ही कोर्सेस में डिजर्टेशन अर्थात लघु शोध प्रबंध लिखे जाने का प्रावधान है। प्रत्येक विद्यार्थी द्वारा अपने मेजर विषय पर आधारित कोई शोध समस्या चुनी जाती है और उस पर रिसर्च करके लघु शोध प्रबंध तैयार किया जाता है। युवाओं में अनुसंधानात्मक प्रवृत्ति का विकास होना आवश्यक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति उन्हें लघु शोध प्रबंध के माध्यम से यह अवसर दे रही है। साथ ही शोध प्राविधि नामक विषय भी पढ़ाया जा रहा है। यह शोध प्रक्रिया को समझने और उसे क्रियान्वित करने की क्षमता विकसित करती है। आपको अच्छे शोधार्थी बनना चाहिए. नए विषयों का चयन करके उन पर मौलिक लेखन करना चाहिए। अच्छे शोधार्थी बनकर आगे आप पीएचडी कर सकेंगे और उच्च शिक्षा में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के रूप में अपना करियर बना सकेंगे।

  ये बातें प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बड़वानी के स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ द्वारा शोध के महत्व विषय पर आयोजित परिचर्चा में शनिवार को डॉ. मधुसूदन चौबे ने कहीं। यह आयोजन प्राचार्य डॉ. वीणा सत्य के मार्गदर्शन में किया गया। 

प्रक्रिया का पालन करें

 डॉ. चौबे ने विद्यार्थियों को लघु शोध प्रबंध की बाह्य संरचना और आंतरिक विषयवस्तु की विस्तार से जानकारी दी। आवरण पृष्ठ पर लिखी जाने वाली सामग्री और उसके लेखन का तरीका, बाइंडिंग की विधि, उसमें लगाये जाने वाले आवश्यक दस्तावेज, जैसे- इनर पेज, प्राचार्य जी का अग्रेषण पत्र, निदेशक का प्रमाण-पत्र, शोधार्थी का मौलिकता का घोषणा पत्र, लघु शोध प्रबन्ध का विषयवस्तु के अनुसार संगठन जैसे- प्राक्कथन, शोध के उद्देश्य, शोध प्राविधि, शोध परिकल्पना, साहित्य का पुनरावलोकन, शोध क्षेत्र का परिचय और चयनित शोध विषय से सम्बन्धित विभिन्न अध्याय, परिकल्पनाओं का परीक्षण, मूल्यांकन, अनुशंसायें, भावी संभावनाएं, उपसंहार, संदर्भ सूची, परिशिष्ट, छायाचित्र, मानचित्र, टेबल्स, ग्राफ, प्रश्नावलियाँ आदि के बारे में युवाओं को बताया. यदि प्रक्रिया का पालन करके लघु शोध प्रबंध तैयार किया जाता है तो, वह सार्थक कार्य सिद्ध होता है। सहयोग वर्षा मुजाल्दे और वर्षा शिंदे ने दिया।

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