ये हैं मौलाना हबीबुर्रहमान लुधियानवी, हिंदुस्तान की जंग-ए-आज़ादी में मौलाना और उनके परिवार ने एक नुमायां किरदार अदा किया था,
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ये हैं मौलाना हबीबुर्रहमान लुधियानवी, हिंदुस्तान की जंग-ए-आज़ादी में मौलाना और उनके परिवार ने एक नुमायां किरदार अदा किया था, लेकिन अफ़सोस की आज की तारीख में हम में से ज़्यदातर लोग इनके बारे में नहीं जानते। 1929 का वो वक्त था जब ब्रिटिश अधिकारियों ने लुधियाना के घास मंडी चौक पर हिंदुओं और मुसलमानों के लिए अलग-अलग पानी के बर्तन का इस्तेमाल किया, तब मौलाना हबीबुर्रहमान लुधियानवी ने इसे तोड़ दिया, और वहाँ पर एक बर्तन रखकर, पर्चा लगवाया ‘सबका पानी एक है’, जिसके लिए उन्हें अंग्रेजी हुकूमत ने ग्रिफ्तार करके जेल भेज दिया था।
जब भगत सिंह ने असेंबली में बम फेंका था तो हर किसी ने भगत सिंह के परिवार से दूरी बना ली थी, और कोई भी उन्हें अपने यहां पनाह देने को तैयार नहीं था, ऐसे में मौलाना हबीबुर्रहमान लुधियानवी आगे आये और उन्हें अपने घर में महीनों तक पनाह दी।
इसके अलावा मौलाना हबीबुर्रहमान लुधियानवी हिन्दोस्तान की आज़ादी में एक अहम् किरदार निभाने वाली तंज़ीम मजलिस ए अहरार के बानिईन (संस्थापकों) में से एक थे। ये तंज़ीम हिन्दुस्तान के बंटवारे की ज़बर्दस्त मुख़ालिफ़ थी।
जैसा की मैंने पहले जिक्र किया की उनके परिवार ने भी एक नुमायां किरदार अदा किया था, दरअसल मौलाना हबीबुर्रहमान लुधियानवी के दादा शाह अब्दुल क़ादिर ने भी 1857 की जंग में पंजाब के क्रान्तिकारियों की रहबरी की थी आख़िरकार चांदनी चौक में अंग्रेज़ों से लड़ते हुए वो शहीद हुए।
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