बैतूल.*वंदे मातरम के माध्यम से आन्दोलन में जोश और उत्साह प्रदान किया जाता था* *वंदेमातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर व्याख्यानमाला संपन्न* अकरम खान पटेल की रिपोर्ट।
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बैतूल। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस जेएच कॉलेज में प्राचार्य डॉ.मीनाक्षी चौबे के संरक्षण व मार्गदर्शन में राष्ट्र गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ.पल्लवी दुबे और डॉ.धर्मेन्द्र कुमार डॉ.अनिता सोनी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस मौके पर डॉ.पल्लवी दुबे ने कहा कि आजादी के लिए संघर्ष के दौर में वंदेमातरम गीत क्रांतिकारियों की आत्मा बन गया था। उन्होंने कहा कि वंदेमातरम गीत गा कर अनेकों क्रांतिकारी हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए। वंदे मातरम गीत का गायन छात्रा सरस्वती छेरपे के द्वारा किया गया। डॉ.धर्मेन्द्र कुमार ने कहा कि इस गीत के माध्यम से आन्दोलन को जोश और उत्साह प्रदान किया जाता था। राष्ट्रगीत वंदे मातरम ने स्वतंत्रता वीरों को आजादी के लिए मर मिटने तक के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि बकिमचंद चटर्जी के द्वारा 1875 में ‘वंदे मातरम’ पत्रिका में सर्वप्रथम यह गीत प्रकाशित हुआ। सन 1950 में डॉ.राजेन्द्र प्रसाद ने वंदे मातरम को राष्ट्र गीत बनाने की घोषणा की। डॉ.अनिता सोनी ने वंदेमातरम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आनंद मठ और धर्म से जुड़ा हुआ गीत कल भी था, आज भी है और हमेशा रहेगा। उन्होंने ओजस्वी कविताओं के माध्यम से युवाओं को राष्ट्र गीत ‘वंदेमातरम’ की भावनाओं से जुड़े हुए राष्ट्र के प्रति समर्पित भाव से अपने कर्तव्य का निर्वहन करने का आव्हान किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो.संतोष पवार द्वारा व आभार वक्तव्य प्रो.राकेश पवार द्वारा व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में 158 विद्यार्थियों की उपस्थिति रहे। इस कार्यक्रम के सफल बनाने में डॉ.लोकेश नरवरे, प्रो.मनेश मानकर, डॉ.शारदा द्विवेदी, डॉ.रश्मि अग्रवाल, डॉ.आरएस सिसोदिया सहित महाविद्यालय के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सराहनीय योगदान रहा।
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