किस्मत न्यूज़ आमला में हजरत मौला अली की विलादत (जन्मदिवस)पर लंगर का आयोजन* *काबा के अंदर हुआ था हजरत अली का जन्म, पूरे विश्व में मनाया जा रहा है अली डे* अकरम खान पटेल की रिपोर्ट।
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किस्मत न्यूज़ आमला।* हजरत मौला अली की विलादत (जन्मदिवस) के अवसर पर आज नगर आमला में अली डे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस मौके पर लंगर का आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर आपसी भाईचारे और इंसानियत का संदेश दिया।
हजरत अली का जन्म 13 रजब को पवित्र खाना-ए-काबा के अंदर हुआ था। शिया और सुन्नी दोनों समुदायों की कई ऐतिहासिक पुस्तकों के अनुसार, हजरत अली की माता हजरत फातिमा बिन्ते असद जब गर्भावस्था के नौवें महीने में थीं, तब काबा की दीवार चमत्कारिक रूप से खुल गई और वहीं हजरत अली की विलादत हुई। यह एक ऐसा अद्भुत प्रसंग है, जो इस्लामिक इतिहास में विशेष स्थान रखता है।
हजरत अली ने 656 ईस्वी से 661 ईस्वी तक शासन किया। उन्हें उनकी बहादुरी, इंसाफ, ईमानदारी और उच्च नैतिक मूल्यों के लिए जाना जाता है। कहा जाता है कि उनके शासनकाल में कोई भूखा नहीं सोता था और किसी के साथ अन्याय नहीं होता था।
*कौन हैं हजरत अली*
हजरत अली, पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब के चचेरे भाई और उनके दामाद थे। वे जनाबे फातिमा जहरा के शौहर और इमाम हसन व इमाम हुसैन के पिता थे। सुन्नी मुस्लिम उन्हें चौथा खलीफा मानते हैं, जबकि शिया मुस्लिम उन्हें पहला इमाम मानते हैं।
पैगम्बर मोहम्मद साहब का प्रसिद्ध कथन है—
“मैं इल्म का शहर हूं और अली उसका दरवाजा हैं।”
हजरत अली ने जंग-ए-बद्र, जंग-ए-खैबर और जंग-ए-खंदक जैसी कई महत्वपूर्ण लड़ाइयों में इस्लाम की रक्षा की। वे केवल वीर योद्धा ही नहीं, बल्कि दयालु और इंसानियत के प्रतीक भी थे।
*हिंदुस्तान सहित विश्वभर में अली डे*
हजरत अली का पवित्र रौजा इराक के नजफ शहर में स्थित है, जहां हर साल हजारों की संख्या में जायरीन पहुंचते हैं। भारत सहित दुनिया भर में 13 रजब को अली डे मनाया जाता है। इस अवसर पर मस्जिदों और दरगाहों में कव्वाली, कसीदे, लंगर और शरबत का वितरण किया जाता है।
आमला में आयोजित कार्यक्रम में हजरत अली की जिंदगी और उनके इंसानियत भरे विचारों पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि हजरत अली हर धर्म और समुदाय के लोगों के साथ बराबरी और भाईचारे का व्यवहार करते थे।
*हजरत अली के प्रेरणादायक संदेश*
सबसे बड़ा गुनाह वह है, जो गुनाह करने वाले की नजर में छोटा हो।
शिक्षा सबसे कीमती चीज है, जिसे कोई चुरा नहीं सकता।
दौलत के कारण दिया गया सम्मान, ईमान को कमजोर करता है।
खुशी में वादा न करें और गुस्से में फैसला न लें।
*काबा में जन्म, मस्जिद में शहादत*
जहां हजरत अली का जन्म काबा के अंदर हुआ, वहीं रमजान की 19 तारीख को इराक के कूफा की मस्जिद में नमाज के दौरान उन पर हमला हुआ। 21 रमजान को उन्होंने शहादत पाई। वे रात के अंधेरे में गरीबों और यतीमों तक खाना पहुंचाते थे और अपना नाम उजागर नहीं करते थे।
हजरत अली की जिंदगी आज भी इंसानियत, न्याय और सच्चाई की मिसाल है, जिससे समाज को सही दिशा मिलती है।
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