नर्मदापुरम.मोदी सरकार बनाए पत्रकार सुरक्षा एवं कल्याण नीति लोकसभा में भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने उठाया मुद्दा. रीपोर्ट मनोहर मालवीय
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नर्मदापुरम/नई दिल्ली : लोकसभा में पत्रकारों की सुरक्षा और उनके कल्याण को लेकर महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया। मध्य प्रदेश के होशंगाबाद-नरसिंहपुर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने शून्यकाल के दौरान केंद्र सरकार से पत्रकारों के लिए एक व्यापक “पत्रकार सुरक्षा एवं कल्याण नीति” बनाने की जोरदार मांग की।
सांसद चौधरी ने पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ करार देते हुए कहा कि पत्रकार केवल समाचार पहुंचाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे शासन और जनता के बीच एक मजबूत सेतु का काम करते हैं। वे सत्ता को जवाबदेह बनाते हैं और समाज को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
फील्ड रिपोर्टिंग में बढ़ते जोखिम
सांसद ने कहा कि फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ता है। कार्यस्थल, घर और रिपोर्टिंग के दौरान उन्हें पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
उन्होंने मोदी सरकार से अपील की कि पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए निम्नलिखित सुविधाएं शामिल की जाएं:
जीवन एवं स्वास्थ्य बीमा की सुविधा
बच्चों के लिए शिक्षा सहायता
पत्रकारों को आवास या प्लॉट आवंटन
रेल यात्रा में 50 प्रतिशत रियायत की पुनर्बहाली
राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर टोल शुल्क में छूट
ईमानदार पत्रकारों का संरक्षण जरूरी
सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने पत्रकारिता के नाम पर हो रहे दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ईमानदार और सच्चे पत्रकारों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, वहीं ब्लैकमेलिंग, अनैतिक गतिविधियों और फेक न्यूज में लिप्त लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने केंद्र सरकार से राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर एक पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था बनाने का आग्रह किया, ताकि पत्रकारिता की गरिमा बनी रहे और भारतीय लोकतंत्र और अधिक मजबूत हो सके।
“कलम सुरक्षित होगी तो लोकतंत्र मजबूत होगा”
अपने संबोधन के दौरान सांसद चौधरी ने कहा,
“जब कलम सुरक्षित होगी, तभी सच निर्भीक होकर सामने आएगा और लोकतंत्र मजबूत होगा।”
उन्होंने यह भी जोर दिया कि पत्रकारों की सुरक्षा सीधे तौर पर लोकतंत्र की मजबूती से जुड़ी हुई है।
सांसद का आह्वान
दर्शन सिंह चौधरी, जो मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम क्षेत्र से जुड़े हैं, ने इस मुद्दे को लोकसभा में उठाकर मीडिया जगत में चर्चा का विषय बना दिया है। कई पत्रकार संगठनों ने सांसद की इस पहल का स्वागत किया है।
वर्तमान समय में जब देशभर में पत्रकारों को कभी-कभी हिंसा, धमकियों और पेशेवर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, ऐसी एक व्यापक नीति बनना पत्रकार समुदाय के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय इस मांग पर क्या ठोस कदम उठाते हैं।
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