ग़ुरबत में भी ज़मीर का सौदा नहीं किया झुक कर किसी अमीर से मिलते नहीं हम…।
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” सिराज ऐ मुनीर”
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Respected sisters and brothers,
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकतुल्लाह।
“तहफ्फूज ऐ ख़ूद्दारी”
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बनी आदम अशरफ़ूल मख़लूक होकर उसे इस मुकाम व मर्तबा को मुसबत (positive) फिक्र व फैल,आदात व आमाल से हासिल करने पर ही करम ऐ ईलाही से दीन व दुनिया की असल कामयाबी हासिल होती है। इस तर्जे ज़िंदगी से ही ख़ूद्दारी (self respect)
की हिफाजत होती है। इस हवाले से अल्लामा इक़बाल फरमाते है: ख़ूदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ूद पूंछे,बता तेरी रज़ा क्या है।
इक़बाल “नूरानी ”
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Regards:Iqbal Khan Gauri,Retired District Judge,M.P.
Now:Law adviser and Human duties Activist,Ujjain.
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