सुप्रीम कोर्ट ने एस सी एस टी वर्गों के आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने के फैसले के विरोध में लॉर्ड बुद्धा फाउंडेशन (भारत) द्वारा राष्ट्रपति के नाम जिलाधीश को सोपा ज्ञापन*            किस्मत न्यूज़          ओमप्रकाश मालवीय  – किस्मत न्यूज

किस्मत न्यूज

Latest Online Breaking News

सुप्रीम कोर्ट ने एस सी एस टी वर्गों के आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने के फैसले के विरोध में लॉर्ड बुद्धा फाउंडेशन (भारत) द्वारा राष्ट्रपति के नाम जिलाधीश को सोपा ज्ञापन*            किस्मत न्यूज़          ओमप्रकाश मालवीय 

😊 Please Share This News 😊

रतलाम- सुप्रीम कोर्ट ने 1 अगस्त 2024 को एस.सी.एस.टी. वर्गो के आरक्षण में उपवर्गीकरण करने एवं क्रिमिलेयर लागू करने के आदेश दिया था। जिससे एस. सीएसटी वर्ग के करोडो लोगो के संवैधानिक अधिकार खतरे मे पड़ते दिख रहे है इसी कड़ी लॉर्ड बुद्धा फाउंडेशन (भारत) संगठन के द्वारा राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सोपा मुख्य रूप से 16 मांग की गई जो निम्नलिखित है -1.माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 01.08.2024 को आरक्षण में आरक्षण का दिया गया फैसला निरस्त किया जाय । 2.हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति लिखित व मौखिक परीक्षा के माध्यम से होना अनिवार्य किया जाय। आजादी के बाद से ही कालेजियम सिस्टम यानी एक दूसरे की सिफारिश से हुई नियुक्तियों में ऐसे व्यक्ति आये है जिन्हें संविधान का ज्ञान नहीं होने से अपनी मनमर्जी से टिका टिप्पणा और निर्णय पारित किये जाने से न्याय के प्रति आरक्षित वर्ग का विश्वास उठता जा रहा है। ऐसी दशा में बिना परीक्षा के नियुक्ति देना त्वरित रूप से बंद किया जाए । 

3.भारत सरकार के सभी मंत्रालयों में आजादी के बाद से ही प्रशासनिक पदों पर आरक्षण की पालना नहीं की जा रही है और एक ही जातिके व्यक्तियों का कब्जा चला आ रहा है जिससे आरक्षित वर्ग के नागरिकों को उनके सवैधानिक मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है/ को त्वरित रूप से रोका जाय और सभी जाति धर्म के योग्य अधिकारियों को पदस्थ किया जाय । 4. सघ लोक सेवा आयोग पिछले कुछ वर्षों से संविधान के प्रावधानों का उल्लघन कर भेदभावपूर्ण नीति अपनाई जा रही है. को व्वरित रूप से समाप्त किया जाय । 5. आरक्षण की अवहेलना को संज्ञेय अपराध घोषित किया जाय और आरक्षण को संविधान की 9वीं अनुसूची में डाला जाय। 6. भारत के संविधान में व्यवस्था है कि अपराधों पर नियंत्रण का अधिकार राज्यों का है मगर पिछले कुछ वर्षों में अनुजाति जनजाति एवं महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहे है जिसमें राज्यों के पुलिस महानिदेशकों का अहम रोल रहा है जो अपने अधिनस्थों पर नियंत्रण करने में असफल हो रहे है ऐसे आई पी एस अधिकारियों को बी. एस. एफ. सी.आर.पी. एफ., औद्योगिक सुरक्षा बल, असम राईफल शस्त्र पुलिस बल में भेजा जाय और वहाँ कार्यरत ईमानदार व राष्ट्र के प्रति समर्पित अधिकारियों की राज्यों में कानूनी व्यवस्था में ड्यूटी लगाई जाय जैसे उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र पश्चिम बंगाल आदि । 7.भारत में जातीय जनगणना त्वरित रूप से करायी जाय । 8.अनु जाति अनु जनजाति, पिछडे वर्ग की जातियों के जाति प्रमाण-पत्रों कीs मान्यता अपने राज्य के अलावा सपूर्ण भारत में लागू की जाय ।00 अनु जाति, अनु जनजाति, अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग सफाई आयोगों की रिपोर्ट पिछले 15-20 वर्षों से जारी नहीं हुई है और ना ही उनकी गतिविधियों लोकसभा व राज्यसभा के पटल पर नहीं रखे जाने से इन वर्गो का विकास अवरूद्ध हुआ है और विकास का बजट भी कम कर दिया है बजट 25 से 30 गुना बढ़ाया जाय । 10.अनु जाति आयोग भारत सरकार नईदिल्ली की शाखाएँ भारत के प्रत्येक प्रान्त में थी जो पिछले 10-15 वर्षों से राज्यों की शाखाएँ समाप्त कर दी है और आयोग में रिक्त पदों की पूर्ति नहीं की जा रही है जिससे इस वर्ग की मानीटरिंग नहीं हो रही है।

11. डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर प्रतिष्ठान 15. जनपद नईदिल्ली को जारी बजट पिछले 15 वर्षों से समाप्त कर दिया है जिससे सारी गतिविधियों बंद पडी है की बहाल किया जाय और पर्याप्त बजट दिया जाय । 12. म.प्र. उ.प्र. के केडर के आई.पी एस अधिकारी अपराधों पर नियंत्रण में असफल हो रहे है का अन्य राज्यों में अथवा भारत सरकार के अन्य प्रतिष्ठानों में स्थानान्तर किया जाय। ऐसे अधिकारियों की की गई की जा रही शिकायतों पर केन्द्र सरकार गृह मंत्रालय त्वरित कार्यवाही करने की अधिसूचना सार्वजनिक रूप से जारी की जाय ।

13.अनु जाति जनजाति निवारण अत्याचार अधिनियम 1989 को शक्ति से लागू किया जाय और जो अधिकारी रिपोर्ट दर्ज नहीं करता है उस पर पुलिस अधीक्षक त्वरित कार्यवाही करके दिशा निर्देश जारी किये जाय और वापस भारतके नागरिकों को दिया जाय। अत्याचार से पीडितों की राहत राशि 10 गुना बढ़ाई जाय ।

14.भारत की राष्ट्रीय सम्पत्ति को पिछले 15 वर्षों से लगातार निजी क्षेत्रों में दी गयी/देची गयी है को निरस्त किया जाय । 15.हर क्षेत्र की शिक्षा का निजीकरण पूर्णतया समाप्त किया जाय । 16 भारत की बैंकों से लूटकर विदेशों में भागे लोगों से त्वरित रूप से वसूली की जाय। इनके अलावा और भी कई बिन्दु है जो अगले चरण में उठाया जायगा ।. इस मौके पर मुख्य रूप से लॉर्ड बुद्धा फाउंडेशन (भारत) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी. एल.सूर्यवंशी जीमधु जी पटेल हीरालाल परमार नाथूलाल कटारिया श्यामलाल परमार जगदीश जी सूर्यवंशी मोतीलाल जी कटारिया गोपाल जी कटारिया जय राम जी कटारिया मितेश जी तेजपाल जी डाबी भागीरथ परमार रवि पडियार मोहनलाल परिहार विक्रम जी वाघेला आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।

व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें 

स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे

Donate Now

[responsive-slider id=1466]