क्यों बचा रहे वरिष्ठ अधिकारी जेल प्रहरी को* उज्जैन महिदपुर/जगदीश परमार *मामला न्यायालय में जा सकता*
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उज्जैन केंद्रीय जेल सर्किल के अंतर्गत आने वाली महिदपुर उप जेल में पदस्थ जेल प्रहरी माखन मालाकार को बचाने में लगे विभागीय अधिकारी ऐसी जानकारी सूत्रों से मिली सूत्र.
26 जनवरी 2001 में राज्य शासन नियम बनाया था यदि किसी व्यक्ति की तीन संतान जीवित स्थिति में है तो उसे शासकीय नौकरी की पात्रता नहीं होगी,
नियम लागू होने के बाद यदि किसी व्यक्ति की शासकीय नौकरी लगी उसके बाद उसकी शादी हुई और तीन बच्चे हुए तो उसे नौकरी से बर्खास्त करने का प्रावधान बना,
ऐसा ही एक मामला छिंदवाड़ा का आया एक महिला शिक्षक की शादी कानून लागू होने के बाद हुई उस दौरान उसे तीन बच्चे हुए नियम के विरुद्ध का हवाला देते हुए उसे बर्खास्त कर दिया गया,
26 जनवरी 2001 में राज्य शासन का कानून लागू हुआ था जिसमें जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए शासकीय नौकरी करने वाले व्यक्ति को मात्र दो ही संतान होना चाहिए,
यदि तीन संतान हुई तो उचित कार्रवाई कर उसे उस पद से बर्खास्त कर दिया जाएगा,
लेकिन महिदपुर उप जेल में पदस्थ जेल प्रहरी माखन मालाकार की तीन संतान होने के बाद भी दो संतान का उल्लेख कर आराम से नौकरी कर रहा इसकी शिकायत कई विभागों में कर दी गई लेकिन शिकायत का अभी तक कोई परिणाम सामने नहीं आया और यदि ऐसा है तो छिंदवाड़ा में जो महिला शिक्षक को बर्खास्त कर दिया वापस से उसे नौकरी मिलना चाहिए नहीं तो जेल प्रहरी माखन मालाकार के ऊपर भी कार्रवाई कर बर्खास्त करना चाहिए अब मामला न्यायालय में जाने को लेकर इससे पीड़ित लोग सक्रिय हो गए हैं,
हमारे अति विश्वसनीय सूत्र बताते हैं भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों से सेटिंग कर ली जिसको लेकर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है जबकि विभागीय जांच प्रारंभ हो चुकी हैं,
कई बार सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत जेल प्रहरी माखन मालाकार की लंबित है अभी तक उनका भी निराकरण नहीं किया गया है अब देखना है कब तक इस जेल प्रहरी के ऊपर गलत तरीके से नौकरी करने को लेकर गाज गिरती है
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