मकर संक्रांति के उपलक्ष में पतंग, गुड़ और तिल का संदेश”
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“सकारात्मक चिंतन ”
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आत्म अवलोकनार्थ।
सम्मानीय आत्मजन,
शुभ दिवस ।
” मकर संक्रांति के उपलक्ष में पतंग, गुड़ और तिल का संदेश”
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हमारे रिश्तों में मिठास बनी रहे,
संबंधो में जोते की तरह हो संतुलन ।
पतंग के जोते के धागे की तरह है नाज़ुक हमारे रिश्ते है…जोते सही न बंधें हों तो पतंग आसमां तक नहीं पहुंच पाती। छोटी सी उड़ान भी नहीं भर पाती। जीवन में भी रिश्तों की अहमियत जोतों की तरह होती है। बहुत नाजुक धागे की तरह। फिर रिश्ता चाहे सामाजिक हो ..पति-पत्नी का हो या सास-बहू का या आपका अपना ,दोस्तों वाला,जोते ठीक न बंधें हों तो जीवन में गोते लगने लगते हैं। सामंजस्य रूपी जोते बंधें हों तो परिवार का और आपस का संतुलन बना रहता है ..गुड तिल जैसा तालमेल और मिठास बनी रहे…
तो आइए इस संक्रांति को हम उड़ती पतंग में देखें ..हम अपना जीवन ,अपने रिश्ते..और बन जाएं हम भी पतंग सा…हल्का, रंगदार, संतुलित, उम्मीद-उत्साह से भरा और आसमां में बने रहने को बेताब।
आप समस्त आत्मजन को मकर
संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाईयाँ ।
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Regards:Iqbal Khan Gauri,Retired District Judge,M.P .
Now:Law adviser & Human duties Activist,Ujjain.
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