धार्मिकता कोई साम्प्रदायिक अवधारणा नहीं है।
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” सकारात्मक चिंतन “
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आत्म अवलोकनार्थ।
सम्मानीय आत्मजन,
शुभ दिवस ।
“धार्मिकता का धरातल”
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धार्मिकता कोई साम्प्रदायिक अवधारणा नहीं है। धार्मिकता,मनुष्य जाति के लौकिक व पारलौकिक जीवन की सार्थक सफलता के लिए मानव धर्म से उत्पन्न सनातन,सर्वव्यापक व सार्वभौमिक आचरण संहिता है।धार्मिकता मनुष्य जीवन मे व्यक्तिगत,पारिवारिक व सामाजिक स्तर पर समस्त वैचारिक व क्रियात्मक अभिव्यक्तियों का धरातल है।धार्मिकता से आत्मीयता,आत्मीयता से मानवीयता,
मानवीयता से नैतिकता,नैतिकता से सत्यता,सत्यता से न्यायिकता, न्यायिकता से पवित्रता,पवित्रता से दिव्यता और दिव्यता से भव्यता का सृजन व उन्नयन होकर आदर्श मनुष्य,आदर्श परिवार व आदर्श समाज का निर्माण होकर धरती पर स्वर्ग का राज्य स्थापित होने की ईश्वरिय योजना का मार्ग प्रशस्त होता है।
अज्ञात “भारती”
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Regards:Iqbal Khan Gauri,Retired District Judge,M.P.
Now:Law adviser & Human duties Activist,Ujjain.
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