*बसंत पंचमी पर मुस्लिम इलाकों में* *बिखरा सदभावना का रंग* *खानकाहों से निकाले गए जुलूस* *तालिब हुसैन*
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” सिरों पर पीली टोपी..अदब से चलते अकीदतमंद..बसंत पंचमी के कलाम पढ़ते हुए टोली..हर आने जाने वालों का ध्यान खींच रही थी..यह नज़ारा किसी उर्स का नहीं बल्कि दरबारे सफ़वी से निकाले गए जुलूस का था.”
जबलपुर. महान सूफ़ी संत हज़रत अमीर खुसरो की सदियों पुरानी परम्परा का निर्वाह करते हुए खानकाहों में भी बसंत पंचमी पर उत्सव का माहौल रहा. नई बस्ती गोहलपुर स्थित दरबारे सफ़वी से सूफी सरदार हाजी अब्दुल हकीम बाबा की सदारत में बसंत पंचमी जुलूस निकाला गया. मुस्लिम बहुत क्षेत्र में गश्त करते हुए जुलूस दरगाह बहादुर अली शाह मोमिनपुरा में समाप्त हुआ. जहाँ कव्वाल हज़रात ने कलाम पेश किए. इस मौके पर
सरदार अब्दुल हकीम बाबा ने कहा बसंत पंचमी इंसानी रिश्तों को जोड़ने और सदभावना का पैग़ाम देती है. यह भारतीय संस्कृति में अनेकता में एकता का जीवन्त प्रमाण है. जुलूस में
हज़रत बाबा रहीम उल्ला शाह, खुर्शीद बाबा, मेहमूद बाबा, मुन्ना केवट हकीमी, विनीत अग्रवाल, नीलेश पसारी, पत्रकार तालिब हुसैन, बाल वीडियो एडीटर मुहम्मद मुज़म्मिल हुसैन, शुभम सैनी, बाबू बाबा आदि की मौजूदगी उल्लेखनीय रही.
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