स्थिति यह हो गई है कि उच्च न्यायालय परिसर में बाबा साहेब की प्रतिमा को प्रवेश करने से रोका जा रहा
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ग्वालियर में माननीय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ में भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार एवं शोषितों वंचितों व महिलाओं के मुक्तिदाता, ज्ञान के प्रतीक, विश्व रत्न ,परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की प्रतिमा की स्थापना को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक अपमानजनक मोड़ पर पहुँच गया है।
आज स्थिति यह हो गई है कि उच्च न्यायालय परिसर में बाबा साहेब की प्रतिमा को प्रवेश करने से रोका जा रहा है।
यह विरोध किसी और ने नहीं, बल्कि स्वयं कुछ वकीलों द्वारा किया जा रहा है — जो संविधान की शपथ लेकर न्याय की लड़ाई लड़ने का दावा करते हैं।
यह वही बाबा साहेब हैं जिनकी बदौलत इन वकीलों को आज यह मंच और यह अधिकार मिला कि वे न्याय की बात कर सकें।आज उन्हीं की प्रतिमा को हाई कोर्ट परिसर में प्रवेश तक नहीं करने देना — यह सिर्फ एक मूर्ति नहीं, संविधान, सामाजिक न्याय और करोड़ों वंचितों की चेतना को ठुकराने की कोशिश है।
17 मई को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय सुरेश कुमार कैथ जी द्वारा इस प्रतिमा का अनावरण प्रस्तावित है — फिर कुछ वकीलों द्वारा यह असहमति — किस मानसिकता को दर्शाती है?
क्या बाबा साहेब की प्रतिमा से संविधान विरोधी सोच को डर लगता है?
क्या न्याय की कुर्सियों पर बैठ कर सामाजिक न्याय का विरोध करना अब सामान्य हो गया है?
हम स्पष्ट कहना चाहते हैं: बाबा साहेब किसी जाति या वर्ग के नहीं नेता नहीं — भारत के लोकतंत्र, कानून और न्याय की नींव हैं।उनकी प्रतिमा का विरोध, इस देश की आत्मा पर हमला है।
हम MP MyGov माँग करते हैं कि:-
1. बाबा साहेब की प्रतिमा को तत्काल उच्च न्यायालय परिसर में सम्मानपूर्वक स्थापित किया जाए।
2. इस रोक के पीछे जिम्मेदार तत्वों की पहचान कर कार्यवाही की जाए।
बाबा साहेब का अपमान नहीं सहेंगे!
CM Madhya Pradesh
Dr Mohan Yadav
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