विश्वास अर्थात अज्ञात शक्ति में श्रद्धा। विश्वास से श्रद्धा और श्रद्धा से भक्ति व अन्य कर्मकांडों का उदय व निर्माण होता है।
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” सकारात्मक चिंतन “
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आत्म अवलोकनार्थ ।
सम्मानीय आत्मजन,
स्वस्थ,सुखद व सुरक्षित जीवन की प्रार्थना के साथ शुभ दिवस।
“विश्वास की विशालता”
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विश्वास अर्थात अज्ञात शक्ति में श्रद्धा। विश्वास से श्रद्धा और श्रद्धा से भक्ति व अन्य कर्मकांडों का उदय व निर्माण होता है।
विश्वास का सम्बन्ध सदैव आत्म विश्वास से ही होता है। आत्म विश्वास ही सकारात्मकता/रचनात्मकता/मानवता का मार्ग प्रशस्त करता है।आत्म विश्वास के अभाव में मनुष्य जीवन में अपेक्षित व आवश्यक
क्रियाशीलता,सजगता,
समर्पण व जीजिविषा का अभाव होता है।
जैसे ज्ञान व अनुभव में शिक्षा वृद्धि व विस्तार करती है,वैसे ही साहस व संकल्प शक्ति में आत्म विश्वास विस्तार व विकास करता है।
विश्वास ही आस्था का आधार है।विश्वास ही कर्मयोग,ज्ञानयोग व भक्तियोग में परिश्रम व प्रयास को साहस व संकल्प प्रदान कर सार्थक परिणाम/सफलता/चमत्कार का मार्ग प्रशस्त करता है।
आत्म विश्वास से आंतरिक शक्ति व ऊर्जा का अंकुरण/पल्लवन व विकास होकर आंतरिक शक्ति ही साहस व संकल्प जैसी सूक्ष्म शक्तियों को बल प्रदान कर परिश्रम व प्रयास की बाह्य शक्तियों के प्रयोग से सार्थक लौकिक व पारलौकिक सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
अनंत ” भारती “
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Regards:Iqbal Khan Gauri,
Retired District Judge,M.P.
Now:Law adviser and Human duties Activist,
Ujjain,M.P.
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