श्री गणेश कर्मकांड से होता है,किन्तु आत्म साधना ही पूर्णाहूति का मार्ग प्रशस्त करती है। – किस्मत न्यूज

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श्री गणेश कर्मकांड से होता है,किन्तु आत्म साधना ही पूर्णाहूति का मार्ग प्रशस्त करती है।

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” सकारात्मक चिंतन “

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 आत्म अवलोकनार्थ।

 सम्मानीय आत्मजन,

 स्वस्थ,सुखद व सुरक्षित जीवन की प्रार्थना के साथ शुभ दिवस।

” आत्मा व कर्मकांड “

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  सामान्यतः लौकिक व पारलौकिक पक्ष की किसी भी विषय वस्तु के दो पक्ष/घटक/ कारक होते है।प्रथम आत्मिक/भाव पक्ष और द्वितीय शारीरिक/भौतिक/कर्मकांड पक्ष।

      अन्य शब्दों में कर्मकांड से ही आत्म दर्शन की यात्रा का श्री गणेश होता है। कर्मकांड अवश्य ही प्रथम चरण है, किन्तु इस चरण पर ही अटके रहना अज्ञानता होकर लख चौरासी में आवागमन का कारण हो सकता है। इसलिए सच्चिदानंद या किसी भी लौकिक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कर्मकांड से अधिक महत्वपूर्ण व आवश्यक आत्म या भाव पक्ष होता है। किसी भी विषय वस्तु के आत्मिक अथवा भावपक्ष की साधना ही भौतिक अभिव्यक्ति को सार्थक सौन्दर्य,आनंद व संपूर्णता प्रदान करती

 है।

      श्री गणेश कर्मकांड से होता है,किन्तु आत्म साधना ही पूर्णाहूति का मार्ग प्रशस्त करती है।

      अनंत “भारती”

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 Regards:Iqbal Khan Gauri,

Retired District Judge,M.P.

 Now:Law adviser and Human duties Activist,

Ujjain,M.P.

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