अभी तो शुरुआत है। बदलाव का कारवां आगे बढ़ेगा। जय भीम! जय भारत! #Chandshekhar ajad
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आज नगीना की पवित्र धरती से सांसद बने मुझे एक वर्ष पूरा हुआ। यह केवल एक पद की वर्षगांठ नहीं, बल्कि उस भरोसे, संघर्ष और आंदोलन की ताक़त का प्रतीक है, जिसे आप सबने अपनी मेहनत, अपने वोट और अपने विश्वास से संसद तक पहुँचाया।
मैं इस ऐतिहासिक अवसर पर बहुजन महापुरुषों, पूरे बहुजन समाज और नगीना की समस्त सम्मानित जनता को नमन करता हूँ।
मैं यह स्पष्ट करता हूँ कि हमारी राजनीति सिर्फ़ कुर्सी के लिए नहीं, बल्कि संविधान बचाने, समानता स्थापित करने और सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई को मजबूत करने के लिए है — और इस एक वर्ष में मैंने संसद के अंदर और बाहर यही संकल्प दोहराया है।
मैं विशेष रूप से महिलाओं, किसानों, ग़रीबों, मज़दूरों, युवाओं, दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और मुस्लिमों, सिक्खों, जैनों, ईसाई साथियों का धन्यवाद करता हूँ, जिन्होंने भरोसे और समर्थन से मुझे यह ज़िम्मेदारी सौंपी।
इस एक साल में मैंने —
• संसद में महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार को लेकर कई सवाल उठाए। नारी गरिमा और स्वावलंबन की आवाज़ को मजबूती से रखा।
• किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी गारंटी देने, कर्ज़माफी और सिंचाई की समस्याओं पर बहस की।
• ग़रीबों को राशन, शिक्षा, इलाज और आवास जैसे बुनियादी अधिकारों की गारंटी दिलाने के लिए सरकार से जवाब माँगा।
• मज़दूरों और दिहाड़ी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मज़दूरी, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की माँग को उठाया।
• बेरोज़गार युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों में रिक्त पद भरने, पारदर्शी भर्तियों और प्रशिक्षण संस्थानों की मांग की।
• दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई — और बिना किसी भेदभाव के हर उस पीड़ित के पक्ष में खड़े हुए, जिसकी आवाज़ दबाने की कोशिश की जा रही थी।
• दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के अधिकारों एवं आरक्षण पर हो रहे हमलों का विरोध किया, और उनके साथ-साथ धार्मिक अल्पसंख्यकों के हक़ में भी आवाज़ बुलंद की।
यह एक वर्ष संघर्ष, सीख और सेवा का रहा।
मुझे यह ज़िम्मेदारी हमेशा याद है कि संसद में मेरी हर बात उस जनता की आवाज़ है, जो वर्षों से हाशिए पर धकेली जाती रही है।
मैं फिर दोहराता हूँ– मेरी राजनीति बहुजन महापुरुषों, तथागत गौतम बुद्ध, संत रविदास, गुरु नानक देव जी, गुरु घासीदास जी, भगवान वाल्मीकि जी, संत कबीर जी, रानी झलकारी बाई, छत्रपति शाहूजी महाराज, छत्रपति शिवाजी महाराज, टीपू सुल्तान, राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले, मां सावित्रीबाई फुले, मां फूलन देवी, सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा, रानी अवंती बाई लोधी, सम्राट मिहिर भोज, दीना-भाना वाल्मीकि, नारायण गुरु, शहीद उधम सिंह, पेरियार ई.वी. रामास्वामी नायकर, सर छोटू राम, धन सिंह कोतवाल, सर सैयद अहमद ख़ान, रामस्वरूप वर्मा, वी. पी. मंडल, कर्पूरी ठाकुर, पेरियार ललई यादव, महाराजा बिजली पासी, रानी अहिल्याबाई होलकर, मोहम्मद अब्दुल जलील फरीदी, परम पूज्य विश्वरत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, मान्यवर कांशीराम साहब, डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, और अन्य सभी महापुरुषों के विचारों से प्रेरित है — जिनके सामाजिक परिवर्तन के सपनों को साकार करने का संकल्प मैंने लिया है।
अभी तो शुरुआत है। बदलाव का कारवां आगे बढ़ेगा।
जय भीम! जय भारत!
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