“पराधीनता से मुक्ति की ओर: सकारात्मक चिंतन का महत्व” या फिर यह भी अच्छा विकल्प हो सकता है: “स्वतंत्रता की दिशा में: पराधीनता के अंधकार से प्रकाश की ओर” – किस्मत न्यूज

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“पराधीनता से मुक्ति की ओर: सकारात्मक चिंतन का महत्व” या फिर यह भी अच्छा विकल्प हो सकता है: “स्वतंत्रता की दिशा में: पराधीनता के अंधकार से प्रकाश की ओर”

इक़बाल खान गोरी

Justice

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” सकारात्मक चिंतन “

   🙂🙂🙂🙂🙂

  आत्म अवलोकनार्थ।

 सम्मानीय आत्मजन,

  स्वस्थ,सुखद व सुरक्षित जीवन की प्रार्थना के साथ शुभ दिवस।

” पराधीन सपनेहु सुख नाही “

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   पराधीनता अंधकार व अवरोध की भांति होकर वैचारिक व क्रियात्मक स्तर पर स्वतंत्र इच्छा शक्ति के प्रयोग को निषेधित कर व्यक्तिगत,पारिवारिक व सामाजिक स्तर पर उन्नयन व उत्कृष्टता को अतिशय प्रतिकूलतः प्रभावित करती है।

    वास्तव में, पराधीनता की परिस्थितियां प्रकृति के संदेश के विरुद्ध है। प्रकृति ने शिशु रूप में प्रत्येक मनुष्य को स्वतंत्र जन्म दिया है,किन्तु वह स्वयं को पराधीनता से ग्रस्त पाता है।

   पराधीनता की परिस्थितियां मनुष्य जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उपस्थित होती है। ये पराधीनता की परिस्थितियां मनुष्य जाति के लिए सकारात्मक चिंतन के परिप्रेक्ष्य में लक्ष्य/ उद्देश्य संज्ञापित किऐ जा सकते है।

    वेद वांगमय में ध्येय उदघोष है- तमसो मां ज्योतिर्गमय अर्थात अंधकार से प्रकाश अर्थात नकारात्मकता से सकारात्मक की दिशा व दशा में प्रशस्त होना।

   मनुष्य जीवन में सार्थक लौकिक व पारलौकिक सार्थक सफलता के लिए समस्त प्रकार व प्रकृति की पराधीनता से स्वतंत्रता प्राप्त करना प्रथम प्राथमिकता होना अनिवार्य है।

        इक़बाल “भारती “

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  Regards:Iqbal Khan Gauri,

Retired District Judge,M.P.

 Now:Law adviser and Human duties Activist,

Ujjain,M.P.

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