जबलपुर.*हमने चाहा था कि वो उम्र भर साथ चले, वो मिला भी तो बस रास्ता बदलने के लिए* *मशहूर शायर ताहिर फ़राज़ की याद में मुशायरा* *तालिब हुसैन*
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जबलपुर. किसी को खोने का गम भी अजीब होता है, आंखें रोतीं नहीं, दिल रोज़ मरता है. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर धूम मचाने वाले शायर ताहिर फ़राज़ अब इस दुनिया में नहीं है. कुछ दिनों पहले ही उन्होंने जबलपुर में अपनी शायरी से हजारों लोगों की दाद बटोरी थी. लेकिन किसे मालूम था यह उनकी ज़िंदगी का आख़िरी सफ़र है. साहित्यिक अदबी संस्था हम सब द्वारा ताहिर फ़राज़ को ख़िराजे अकीदत देने मुशायरे का आयोजन किया गया. मुशायरे के सूत्रधार सुप्रसिद्ध युवा शायर मन्नान फ़राज़ ने बताया कि इस मुशायरे में देश दुनिया में धूम मचाने वाले कई शायरों व कवियों ने मुशायरे को रौनक बख़्शी. पूर्व केबिनेट मंत्री विधायक लखन घनघौरिया कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहें. जबलपुर विकास प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष वरिष्ठ समाजसेवी मुहम्मद कदीर सोनी ने कार्यक्रम
की अध्यक्षता की. निज़ामत मन्नान फ़राज़ ने की. उन्होंने कहा- इतनी खामोशी जमा कर ली है सीने में, अब अगर बोलूं तो रिश्ते बिखर जायेंगे. वो खुदा क्या हुए दुनिया से, कई दिलों की धड़कनें भी साथ चली गयीं. इन अशआर को सुनने वाले गम में डूब गए. मुशायरे में हामिद भुसालवी, उमर आज़मी, सरफ़राज़ मासूम, तारिफ़ निज़ामी, एस.एम. सिराज व डाॅ. दीप शिखा ने मेहफ़िल को परवान चढ़ाया. इसके बाद स्थानीय शायर इरफ़ान झांसवी, विनोद नयन, सिराज आगज़ी, डाॅ. रानू राही, जावेद नाज़, विवेक गुप्ता सहर, अशोक झारिया शफ़क़, नवाब कौसर और रिज़वान हकीमी ने अपने कलामों से लोगों की वाहवाही लूटी. मुशायरे को कामयाब बनाने में डाॅ. प्रशांत मिश्रा की अहम भूमिका निभाई. मुशायरे में पप्पू वसीम खान, पार्षद गुलाम हुसैन आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही.आखिर में मन्नान फ़राज़ ने ही यह कहते हुए मुशायरे का समापन किया- मौत एक शख़्स को ले गयी, ख़ामोशी हजारों में बांट गयी.
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