भगवान श्री महाकालेश्वर की शाही सवारी हेतु 22 अगस्त को यातायात की व्यवस्था
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*प्यास लगी थी गज़ब की….*
*मगर पानी में ज़हर था…..*
*पीते तो मर जाते,, नही पीते तो भी मर जाते….*
*बस यही दो समस्याएं ज़िंदगी भर हल न हुईं….*
*न नींद पूरी हुई न ख़्वाब…..*
*वक्त ने कहा काश तुझे थोड़ा सब्र होता*
*सब्र ने कहा… काश थोड़ा सा वक्त होता…..*
*सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब*
*आराम कमाने निकलता हूं आराम छोड़ कर…..*
*हुनर सड़कों पे तमाशा करता* *है.. और क़िस्मत मेहलों मैं राज करती है….. शिकायत फिर भी* *नही है तुझसे ए जिन्दगी क्यों के जो मिला है मुझे ….वो भी बहुत सो को नसीब नहीं हुआ….*
*अजीब सौदागर है ये वक्त भी…*
*जवानी का लालच बचपन ले गया*
*अमीरी का लालच जवानी ले जाएगा….*
*लोट आता हूं वापस घर की तरफ़ हर रोज़ थका हुआ…*
*आज तक समझ नही पाया जीने के लिए काम करता हूं या काम करने के लिए जी रहा हूं।।*
*थक गया हूं तेरी नौकरी से ए जिन्दगी…….*
*भरी जेब ने दुनिया की पहचान कराई और ख़ाली जेब ने अपनों की……*
*जब लगे पैसा कमाने तो समझ आया शौक तो बाप के पैसों से पूरे होते हैं अपने पैसे तो ज़रूरत पूरी करते हैं बस…*
*हंसने की ख्वाहिश न हो*
*तब भी हंसना पड़ता है…*
*कोई पूछे कैसे हो?*
*तो ’’सब बढ़िया है” कहना पड़ता है ।।*
*ये ज़िंदगी का शो है एक्टिंग तो करनी पड़ती है*
*माचिस की ज़रूरत यहां नही पड़ती यहां आदमी आदमी से जलता है।।*
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