बाबर ने हिंदुस्तान में जिस सल्तनत की बुनियाद रखी उसके बेटे हुमायूं के हाथों से वो निकल गयी – किस्मत न्यूज

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बाबर ने हिंदुस्तान में जिस सल्तनत की बुनियाद रखी उसके बेटे हुमायूं के हाथों से वो निकल गयी

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बाबर ने हिंदुस्तान में जिस सल्तनत की बुनियाद रखी उसके बेटे हुमायूं के हाथों से वो निकल गयी। 17 मई सन् 1540 ई. को कन्नौज में शेर शाह सूरी से शिकस्त खाने के बाद हुमायूं को हिंदुस्तान छोड़ना पड़ा महज 13 सालों में ही मुगलों का हिंदुस्तान से सफाया हो गया। हुमायूँ अपने बचे हुए चंद साथियों के हमराह लाहौर और सिंध की ओर रवाना हो गए।

इसी दौरान हुमायूं ने 29 अगस्त, 1541 ई. को ‘मीर अली अकबरजामी’ की बेटी हमीदा बेगम से निकाह किया। और जिलावतनी के दौरान ही 15 अक्टूबर 1542 ई. को उमरकोट में उनके बेटे अकबर की पैदाइश भी हुयी। तख़्त-ए-तैमूरी के ताजदार जंगल और पहाड़ों में गुजर बसर करते हुए और अपने एक-एक साथी को गवांते हुए ईरान की ओर बढ़ रहे थे। इस दौरान अगर जंगल में उनके हाथ शिकार न लगता तो उन्हें अपने ही घोड़ों को जिबा कर पेट भरना पड़ता था। 11 जुलाई 1543 तक हुमायूँ अपनी बीवी समेत महज 40 लोगों के हमराह ईरान के शहर हेरात जा पहुंचे।

वहां उनका इस्तेकबाल शाहे ईरान के बड़े बेटे सुल्तान मोहम्मद मिर्ज़ा ने किया। ईरान के बादशाह ने हुमायूं को 20,000 का फ़ौजी लश्कर फ़राहम किया इसके बाद हुमायूँ तबरेज और मसद के रास्ते होते हुए कंधार पहुंचे। 6 महीने के अंदर हुमायूँ ने अपने भाई अस्करी मिर्ज़ा से कंधार छीन लिया। और कंधार को फौज देने के एवज में शाहे ईरान के सुपुर्द कर दिया।

इसके बाद हुमायूं ने अपने दूसरे भाई कामरान मिर्ज़ा से काबुल छीना। और इसके बाद हुमायूं ने 1555 ई. में मुकम्मल पंजाब पर फतह हासिल कर ली। और आखिर में सरहिंद के मक़ाम पर सिकंदर शाह सूरी को शिकस्त दे कर दोबारा हिंदुस्तान को हासिल कर लिया। 15 साल तक चली तवील जिलावतनी बाद हुमायूं दोबारा हिंदुस्तान के बादशाह बनने में कामयाब हो गए।

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